पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी की दौड़ में बरेली तीन बार शामिल हुआ लेकिन नाकाम रहा। यह नाकामी नगर निगम चुनाव में भी मुद्दा बनी। भाजपा ने चुनाव में इसे जोरशोर से उठाया और इसके पीछे ढंग से काम न करने की वजह बताई। हालांकि सपा ने स्मार्ट सिटी चयन में सपा का मेयर होने के चलते भेदभाव की बात कही थी।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्मार्ट सिटी की घोषणा करने के बाद पहली बार वर्ष 2015 में बरेली नगर निगम ने इस दौड़ में शामिल होने के लिए जोर लगाया था, मगर कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद प्रोजेक्ट बनाने वाली एजेंसी बदल दी गई। फिर जुलाई, 2016 और मार्च, 2017 में भी प्रोजेक्ट को संशोधित कर जोर लगाया गया लेकिन स्मार्ट सिटी में शामिल होने का शहरवासियों का सपना फिर भी पूरा नहीं हुआ। कभी स्मार्ट सिटी की वोटिंग के लिए शहरवासियों के रुचि न लेने तो कभी राजस्व में कमी इस प्रोजेक्ट के नुकसान का कारण साबित हुई। शहर की दशा सुधारने के लिए प्रोजेक्ट में शामिल रेट्रोफिटिंग का प्रस्ताव भी पसंद नहीं किया गया था। इसके बाद चौथी बार नवंबर 2017 में प्रोजेक्ट भेजा गया। इस बार राजस्व के लिए जरी-जरदोजी कारोबार पर ज्यादा फोकस किया गया, तब कहीं सफलता हाथ लगी। मेयर उमेश गौतम ने इसका क्रेडिट लेते हुए कहा कि पहले अच्छी सोच के साथ इस प्रोजेक्ट पर मेहनत नहीं की गई, इसी वजह से नाकामी हाथ लगी। अब टीम अच्छी है तो हम सफल हुए हैं।