बरेली। स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए केंद्रीय टीम के सोमवार तक शहर आने की संभावना है। दूसरी ओर, घनी आबादी के बीच बनाए गए डलावघर स्वच्छता की पोल खोल रहे हैं। कई डलावघरों में न तो छत है, न ही दीवार। बदबू दूर से ही हकीकत बयां कर देती है। केंद्रीय टीम के सामने यह हकीकत बेपर्दा हुई तो अंक कटने तय हैं। शहर की रैंकिंग भी प्रभावित हो सकती है। यही हाल रहा तो शहर का टॉप-50 में आना भी मुश्किल हो जाएगा।
केंद्रीय टीम पांच से 10 दिन तक शहर में रुककर सफाई और कचरा प्रबंधन की हकीकत परखेगी। नगर निगम के अफसर इस बार शहर को टॉप-20 में लाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन लचर तैयारियों को देखकर इस पर यकीन कर पाना मुश्किल है। शहर में कूड़ा प्रबंधन की हालत बेहद खराब है। कई मोहल्लों में सफाई भी नहीं हो रही है। सड़कों पर कूड़े के ढेर लग जाते हैं। रविवार को तो बाजार गंदगी से बेजार रहते हैं।
नियमों को ताक पर रखकर बनाए डलावघर
नगर निगम ने नियमों को ताक पर रखकर डलावघर बना दिए हैं। श्यामगंज का डलावघर खुला है। यहां दीवार तक नहीं है और घनी आबादी के बीच बना है। इसका काफी विरोध भी हुआ था। तब रोजाना कूड़ा उठाने और सफाई व्यवस्था दुरुस्त रखने पर मामला शांत हुआ था। अब चार-पांच दिन में एक बार कूड़ा उठता है। इंद्रा मार्केट में ओवरहेड टैंक के नीचे और बराबर में डलावघर बना रखा है, जो नियमों के विरुद्ध है। सरायखाम में भी घनी आबादी के बीच डलावघर खुला हुआ है। संवाद
श्यामगंज डलावघर को साफ कराया जाएगा। इंद्रा मार्केट के डलावघर को शिफ्ट कराया जाएगा। पानी सप्लाई की जगह पर डलावघर नहीं होना चाहिए। साफ-सफाई को लेकर भी निर्देश दिए गए हैं। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त