बिजली आठ घंटे बमुश्किल मिलती है। उसमें भी बार-बार ट्रिपिंग। नहरों में पानी नहीं। धान का बीज, उर्वरक और कीटनाशक तब मिलते हैं, जब बुवाई का समय निकल जाता है और खेत में फसल खड़ी होती है। ऐसे में आप ही बताइए कि उन्नत फसलों की खेती कैसे होगी? ये सवाल थे मंडलीय खरीफ गोष्ठी में दूर दराज गांव से आए किसानों के।
किसानों की आय दो गुनी करने के लिए आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए आईवीआरआई में बुलाई गई गोष्ठी में कृषि वैज्ञानिकों ने धान, तिलहन, दलहन, गोबर से वर्मी कंपोस्ट और नाडेप बनाना, उन्नत प्रजातियों के बीज, फसल में रसायनिक खादों के बजाय जैविक खाद के प्रयोग करने की तकनीक बताई। मगर, किसानों ने जब अफसरों और कृषि वैज्ञानिकों के सामने व्यवहारिक मसले उठाने शुरू किए तो कृषि वैज्ञानिक भी सोच में पड़ गए। किसान सुखदेव सिंह बोले- उन्नत खेती के बीज लुधियाना, जूनागढ़, पंजाब या बाहर से लाने से उपज तो बढ़ेगी लेकिन इससे लागत भी बढ़ जाएगी। ऐसे में दो गुनी आमदनी कैसे होगी। महेंद्र गंगवार का कहना था कि खेती में किताबी आंकड़े नहीं चलते। आप हमारे साथ चलकर एक साल धान, गन्ने की खेती कीजिए। तब पता चलेगा सरकारी अनुदान पर खाद, बीज, कीटनाशक और 18 घंटे बिजली कितनी मिलती है। किसान छेदालाल गंगवार का कहना था कि जेनरिक दवाओं की तरह फसलों में कीड़े और खरपतवार नष्ट करने वाली दवाएं भी सस्ती होनी चाहिए। पूर्व प्रधान चुपकिया अनोख सिंह बोले- गांवों में आठ घंटे से ज्यादा बिजली नहीं मिल रही। नहरों में पानी नहीं। बीज तब मिलता है जब बुवाई हो जाती है। ऐसे में कैसे उपज बढ़ेगी। रामपाल गंगवार बोले- बैंक ने गन्ने पर प्रीमियम काटा। खेत में गेहूं की फसल खड़ी है। क्या फसल बीमा मिलेगा। जवाब मिला- नहीं। किसान जिस फसल का बीमा कराएं, खेती में वही फसल बोएं। नवाबगंज के बाबूराम का कहना था कि चीनी मिलों से गन्ना किसानों का बकाया ब्याज समेत मिलना चाहिए। दमखोदा के नेपाल सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में सिंचाई विभाग के ढोंरा जलाशय पर अवैध खनन के चलते माफियाओं ने नहर पर कब्जा कर लिया है। सूखी नदी बहगुल जलाशय में बदलवा दी गई। जलाशय सूखे होने से नहरों में पानी नहीं आ रहा। फसलें सूख रही हैं। सिंचाई विभाग के एसई अनिल कुमार सेंगर ने कहा कि ये समस्या हफ्ते भर के अंदर सुलझा दी जाएगी।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताए उन्नत खेती के तरीके
कृषि वैज्ञानिक डा. एसपी सिंह ने बताया कि किसान शंकर धान, बांसमती और मोटा धान की नई प्रजातियों में 1609 की नई वैरायटी की पौध लगाएं। 110 दिन में तैयार होगी। उन्होेंने बांसमती की पंत बांसमती एक और पंत बांसमती दो बोएं। तिलहन में शेखर प्रजाति और मूंगफली की पैदावार बढ़ाने के लिए जूनागढ़ से उन्नत किस्म का बीज समूह बनाकर लाने की सलाह किसानों को दी। कहा कि मोटा धान 20 से 30 जून के बीच में लगाने पर उपज बढ़ेगी। बीमारियां भी कम लगेंगी। अरहर की फसल की उन्नत बीज से करके गेहूं की फसल करने के तरीके भी बताए। खरपतवार नाशक के लिए कोराइजन का स्प्रे इस्तेमाल करें। इससे 2022 तक किसानों की आमदनी दो गुना करने का सपना साकार हो सकता है।
किसान ऐसे बढ़ा सकते हैं पैदावार
1- गर्मी में खेत की गहरी जुताई करके
2- ढैंचा की हरी खाद बनाकर
3- अवशेष फसल के कंपोस्ट बनाकर
4- नई प्रजातियों के बीज प्रयोग करके
5- खेत की मिट्टी का लैब में परीक्षण कराना
6- खाद और कीटनाशक का प्रयोग कम करना
7- वर्मी कंपोस्ट और नाडेप का प्रयोग बढ़ाना
कृषि से जुड़े रोजगार प्रोजेक्टर पर दिखाए
स्वयं सहायता समूह बनाकर किसान खासतौर से गांव की महिलाएं कैसे रोजगार कर सकती हैं। इसे गुजरात और छत्तीसगढ़ के समूह के काम को प्रोजेक्टर पर दिखाया गया। इस प्रोजेक्ट के जरिए किसानों को बताया गया कि कैसे वह खेती के साथ स्वयं सहायता समूह बनाकर रोजगार करके अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। मंडलायुक्त ने ये प्रोजेक्ट ब्लाक और पंचायत स्तर पर चलाने के लिए चारो जिलाधिकारियों को कहा।
मंडल में कृषि की स्थिति
खेती का क्षेत्रफल - 12.70 लाख हेक्टेयर
खरीफ की फसल - 10.38 लाख हेक्टेअर
कुल किसान - 14.64 लाख
खरीफ उत्पादन का लक्ष्य - 19.27 लाख मीट्रिक टन
पिछले साल खरीफ उत्पादन का लक्ष्य था - 14.07 लाख मीट्रिक टन
खरीफ में फसली ऋण- 31 अरब, 88 करोड़ 37 लाख
पिछले साल खरीफ फसली ऋण -- 14 अरब 58 करोड़ 35 लाख
किसान क्रेडिट कार्ड वितरण लक्ष्य - चार लाख
कृषि विज्ञान केंद्र - 69
प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र - 20