बरेली। बरेली-सितारगंज हाईवे में घपलेबाजी की जांच रिपोर्ट में दोषी पाए गए पीलीभीत के छह लेखपालों और उनको सह देने वाले अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। जबकि, इस संबंध में शासन की ओर से करीब दो माह पूर्व ही निलंबन के आदेश दिए गए थे। इसके बावजूद अब तक कोई अधिकारी और कर्मचारी नहीं निलंबित हुआ है।
बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा वितरण में घपलेबाजी का खुलासा हुआ था। इसमें तत्कालीन परियोजना निदेशक को निलंबित कर दिया गया था। भूस्वामियों को नियमों के विपरीत जाकर परिसंपत्तियों का अधिक आकलन कर मुआवजा वितरित कर दिया था। जब जांच की गई तो पता चला कि करीब 40 करोड़ रुपये मुआवजे की धनराशि नियमों के विपरीत आकलन कर भूस्वामियों को दी गई है। मामले की जांच कराई गई, तो तत्कालीन अधिकारियों की संलिप्ता सामने आई।
इसमें एनएचएआई के साइट इंजीनियर, नामित एजेंसी साईं सिस्ट्रा ग्रुप एवं एसए इन्फ्रास्ट्रक्चर कंसलटेंसी लिमिटेड के प्रतिनिधि दोषी पाए गए थे। जो निलंबित कर दिए गए थे। वहीं, अधिक मूल्यांकन करने के लिए पीलीभीत के छह लेखपालों और जिन अधिकारियों के संरक्षण में हुआ उन पर भी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। वहीं, अधिक मुआवजा लेने के लिए भवन का निर्माण करने और मुआवजा लेने के बाद भवन ध्वस्त कर मलवा हटाने के लिए भू स्वामी रूसखाना पत्नी शमशाद दोषी पाई गई थी।
दो एसएलएओ के निलंबन की संस्तुति भेजी शासन को
नियुक्ति विभाग केे एक अधिकारी ने बताया कि भूमि अधिग्रहण में हुई घपलेबाजी में संलिप्त पाए जाने पर दो एसएलएओ और एक अन्य अधिकारी को निलंबित करने की संस्तुति शासन को भेजी गई है। इसमें दोनों एसएलएओ बरेली और पीलीभीत में तैनात रहे हैं।
एनएचएआई की ओर से वसूली के लिए पत्र भेजा जाता है। अभी तक ऐसा कोई पत्र नहीं आया है। वहीं लेखपालों पर भी कार्रवाई संबंधी कोई आदेश नहीं प्राप्त हुआ है। - विजय वर्धन तोमर, एसएलएओ, पीलीभीत
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