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‘निर्भया कार्ड’ का लाभ तो नहीं मिला अब ‘182’ देखते हैं

Fri, 26 Feb 2016 02:09 AM IST
बरेली
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बरेली। रेलवे ने पहले महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया कार्ड की योजना शुरू की थी। इसमें आसपास के सभी स्टेशन की जीआरपी के नंबर जारी किए थे, लेकिन ये कार्ड बहुत कामयाब नहीं हुए। रेलवे ने इस बार महिलाओं की सुरक्षा के लिए 182 हेल्पलाइन नंबर शुरू किया है। महिलाओं का कहना है कि अगर इसका ठीक से क्रियान्वयन हुआ तो इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और जागरूकता आएगी।
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय की डीएसडब्लू प्रो. नीलिमा गुप्ता कहती हैं कि पिछली सर्दियों में वह कोलकाता से लौट रही थीं तो बिहार क्रॉस करते हुए एसी सेकेंड क्लास में एक व्यक्ति ने उनका पर्स छीन लिया। बोलीं, मैंने दौड़कर उस व्यक्ति से पर्स छीन लिया, मेरे पास कोई मोबाइल नंबर  नहीं था जीआरपी को बुलाऊं।  लोगों ने नंबर दिया तो जीआरपी ने अगले स्टेशन पर ट्रेन रुकवाकर एफआईआर दर्ज कराई और आरोपी को पकड़ा। इस अनुभव के बाद मुझे लगता था कि रेलवे को महिलाओं की सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन नंबर चाहिए। इसका ठीक से इसका क्रियान्वयन होगा, तभी कोई बात बनेगी।
बरेली कॉलेज की राजनीति विज्ञान की डॉ. मनमीत कौर ने बताया कि हेल्पलाइन नंबर तो बहुत हैं, लेकिन किसी पर भी ठीक से कार्रवाई नहीं होती है। पिछले बजट में महिला डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाने की बात हुई थी, लेकिन अब तक कहीं कैमरे नहीं दिखे।
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33 फीसदी आरक्षण पर महिलाएं खुश
महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देना अच्छी पहल है। इससे सफर करने वाली महिलाओं को राहत मिलेगी। हालांकि, महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे में अक्सर पुरुष यात्री भी बैठ जाते हैं। इस पर रोक लगाई जानी चाहिए
- अनीता बिष्ट, छात्रा, बरेली कॉलेज   
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ट्रेन में सफर करने के नाम से ही जैसे बुखार आ जाता था।  रिजर्वेशन नहीं मिला तो कैसे जाएंगे, लेकिन अब कोई फिक्र नहीं होगी। गर्भवती और छोटे बच्चे के साथ चलने वाली महिलाओं को सुविधा होगी।
- ममता गोयल, समाजसेवी

रेल बजट इफैक्ट

... और महिला डिब्बे में बैठ गए पुरुष
बरेली। रेलमंत्री सुरेश प्रभु का बजट भाषण चल रहा था। रेलवे प्रशासन लाइव भाषण दिखाने की तैयारी में जुटा दिखा। आधे घंटे का भाषण बीत गया तब जाकर कहीं 3जी नेटवर्क कामयाब हुआ। इतने में हिमाचल एक्सप्रेस आ गई। दिल्ली जाने वाली ट्रेन पर यात्रियों की भीड़ चढ़-उतर रही थी। जनरल में भीड़ कम थी, लेकिन स्लीपर खचाखच भरा था। बाथरूम गंदा पड़ा था। वाशबेसिन में भी कूड़ा फंसा दिखा। पान की पीक ने स्टील के बेसिन को लाल रंग दे दिया था। महिला डिब्बे की तरफ पहुंचे तो यहां  दो पुरुष सीट कब्जाए बैठे थे। बताया कि किसी ने टोका नहीं तो बैठ गए।

बैठने को मिलता नहीं बिछाएंगे कहां
प्लेटफार्म नंबर एक पर न्यू तिकसुकिया लालगढ़ एक्सप्रेस आ गई। जनरल बोगी में खड़े होने की भी जगह नहीं थी। यात्री हाथ पैर मारकर सीट कब्जाने में जुटे रहे। 75 यात्रियों के डिब्बे में 150 से अधिक लोग बैठे थे। कुछ यात्रियों ने अपर और साइड बर्थ में चादर फंसाकर जुगाड़ का बिस्तर बना रखा था। यात्रियों से पूछा गया कि जनरल और स्लीपर ट्रेन में बिछाने के लिए चादर और तकिया देने की घोषणा हुई है...वे बीच में ही बोल पड़े खड़े होने की जगह नहीं है। बैठने, बिछाने की बात कहां से हो रही है।

हम लोग दैनिक यात्री हैं। खड़े होकर सफर करना पड़ता है। सरकार ने छोटी-छोटी सुविधाआें पर ध्यान दिया है, लेकिन पिछले साल की कई घोषणाएं पूरी नहीं हो सकी हैं।
- रंजीत दास, यात्री, चंदौसी

स्टेशनों और ट्रेनों में साफ-सफाई को लेकर अभी भी जागरूकता नहीं दिखती। आर्थिक दंड लगाया जाए तो गंदगी करने वाले डरेंगे। युवाआें के लिए सब कुछ ऑनलाइन करना ठीक है।
- अमन, यात्री, बरेली
महिला कोच में पुरुषों का कब्जा रहता है। इस डिब्बे को इंजन के बाद या फिर आखिर में लगाते हैं। बीच में कोच करना अच्छा है। सीट बढ़ाने के साथ ही डिब्बे में सुरक्षा गार्ड भी रहने चाहिए।
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- राम बेटी, यात्री, पीलीभीत
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