निजी अस्पतालों पर भर्ती नहीं करने का आरोप, बुखार और निमोनिया से पीड़ित थी बच्ची
बरेली। पिछले दिनों बुखार से पीड़ित 15 माह के बच्चे की मौत के बाद मंगलवार रात एक और बुखार से पीड़ित बच्ची की मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि निजी अस्पतालों ने भर्ती नहीं किया तो बच्ची को जिला अस्पताल लाया गया। यहां जांच में निमोनिया निकला। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उन्होंने मकान मालिक को जानकारी दी तो उन्होंने शव घर लाने से इनकार कर दिया। बाद में पड़ोसियों के हस्तक्षेप पर मामला सुलझा।
सुभाषनगर में कोरोना संक्रमित एक ही परिवार के छह सदस्य मिलने के बाद निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने सुभाषनगर के बुखार, खांसी, जुुुकाम से पीड़ित लोगों की जांच और इलाज करने से बच रहे हैं। इसी के चलते बुधवार को एक बच्ची की सांसें थम गईं। सुभाषनगर निवासी राजकुमार के मुताबिक करीब दस दिनों से बेटी प्रिया को बुखार आ रहा था। लॉक डाउन होने से बुखार की दवा खिला रहे थे। मगर चार दिन पहले बिटिया की तबीयत बिगड़ी तो वह उसे लेकर निजी अस्पतालों के चक्कर काटे लेकिन कोई भर्ती करने को तैयार नहीं हुआ। वह जिला अस्पताल पहुंचे और वहां जांच की गई तो बच्चे को तेज बुखार ओर सीवियर निमोनिया का पता चला। परिजन को भी जानकारी दी गई लेकिन वह कहीं और ले जाते इससे पहले ही मंगलवार की देर रात बच्ची की सांस थम गईं।
‘बच्ची की तबियत गंभीर थी। जांच में फीवर पायरेक्सिया, एडिमा, निमोनिया मिला। बच्ची का इलाज किया जा रहा था लेकिन बचा नहीं सके। - डॉ. कर्मेंद्र, बाल रोग विशेषज्ञ