कुलपति की पहल का नतीजा
हॉस्टल के वार्डन डॉ. अतुल कटियार ने बताया कि यह सब कुलपति प्रो. केपी सिंह की पहल का नतीजा है। दिसंबर 2024 में रुहेलखंड विश्वविद्यालय और नाइजीरिया की सरकार के बीच हुए एक एमओयू के बाद वहां के 21 छात्र यहां पढ़ाई के लिए आए थे।
शुरुआत में इन छात्रों को यहां की भाषा और खानपान से सामंजस्य बिठाने में दिक्कत हुई थी। वातावरण में बदलाव के कारण कुछ छात्र बीमार भी हुए, लेकिन अब उनकी दिनचर्या सामान्य हो गई है। वह भारतीय संस्कृति और परिवेश को खुशी-खुशी अपना रहे हैं।
नाइजीरियाई छात्रों को हिंदी से लगाव
बीटेक के छात्र याकूब ने कहा कि जब हम पहली बार भारत आए थे, तो सब कुछ बहुत अलग लगा। यहां की भाषा, खाना, सब कुछ नया था, लेकिन हॉस्टल के दोस्त और वार्डन सर ने हमें बहुत सपोर्ट किया। अब मुझे हिंदी गाने सुनना बहुत अच्छा लगता है। कुछ गाने तो याद भी हो गए हैं।
बीएमएस के अब्दुल ने कहा कि मैं भारत आकर बहुत खुश हूं। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। मुझे यहां अपने घर जैसा महसूस होता है। यहां आकर मैंने पतंग बनाना सीखा है, जो मेरे देश में नहीं होता। मैं हिंदी सीखने की कोशिश कर रहा हूं ताकि मैं अपने दोस्तों से और अच्छे से बात कर सकूं।
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