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Bareilly News: वीजा अवधि विस्तार में फर्जीवाड़ा के आरोपी नाइजीरियन छात्र को जमानत मिली

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बरेली। अपर सत्र न्यायाधीश अभि श्रीवास्तव ने 21 जनवरी को नाइजीरिया के कांगो निवासी यूसुफ बाला मुस्तफा को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। उस पर वीजा अवधि बढ़वाने के लिए दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से बीएमएस कर रहे यूसुफ बाला और उसके दोस्त सूडान निवासी सिटी यूनिवर्सिटी लुधियाना के छात्र अयूब अली के खिलाफ 17 नवंबर 2025 को बारादरी थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
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युसूफ ने छात्र वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन किया, जिसके संबंध में गोपनीय जांच एवं जानकारी से यह पाया गया कि युसूफ की ओर से पूर्व में जब सिटी यूनिवर्सिटी लुधियाना से रुहेलखंड विश्वविद्यालय में बीएमएस पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया गया तो नियम अनुसार विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) अमृतसर से स्थानांतरण पंजीकरण प्रमाण/अनुमोदन प्रमाणपत्र प्राप्त किया जाना था, लेकिन उसके द्वारा बिना अनुमोदन प्रमाणपत्र के ही रुहेलखंड यूनिवर्सिटी में प्रवेश ले लिया गया। इसके बाद छात्र ने वीजा अवधि के विस्तार के लिए आवेदन किया।

वीजा अवधि में विस्तार के लिए उसने एफआरआरओ का फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्र अपलोड किया। सर्विस नंबर, यूनिवर्सिटी का नाम, कोर्स का नाम और अन्य जानकारियां भी गलत दर्ज कीं। अयूब अली ने उसकी मदद की थी। संवाद
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पॉक्सो एक्ट में आरोपी होमगार्ड और उसके दो बेटे दोषमुक्त

बरेली। स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट देवाशीष ने 21 जनवरी को 12 साल के बालक से कुकर्म के आरोपी सिरौली थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी होमगार्ड रामवीर उसके बेटे सतेंद्र व भानु प्रताप को दोषमुक्त करार दिया है। गांव के ही एक व्यक्ति ने इन पर अपने बेटे से कुकर्म और शिकायत करने पर घर में घुसकर अपमानित करने का आरोप लगाया था।

गांव के व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 31 जनवरी 2019 को अपराह्न चार बजे उसका बेटे रामलीला मैदान के पास खेल रहा था। सतेंद्र उसको पांच रुपये का लालच देकर गन्ने के खेत में ले गया और उसके साथ कुकर्म किया। शिकायत कराने पर सतेंद्र उसका भाई भानु प्रताप और पिता रामवीर उसके घर में घुस आए। तीनों ने अपमानित करने के लिए गालियां दीं। विवेचना के बाद पुलिस ने सतेंद्र के खिलाफ पॉक्सो एक्ट व घर में घुसकर अपमानित करने की धाराओं में तीनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सात गवाह पेश किए गए। अभियोजन पक्ष आरोपों के समर्थन में ठोस साक्ष्य नहीं दे सका। गवाहों और विवेचक के बयानों में भी विरोधाभास रहा। ऐसे में कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। संवाद
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