परिजन के छलके आंसू, रिहाई को बताया न्याय की जीत
मैनपुरी। जेल में 24 साल बिताने के बाद थाना एलाऊ के गांव ब्योंती कटरा का रहने वाला आजाद खान रिहा होकर अपने घर पहुंच गया है। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उसको डकैती के आरोप से बरी किया है। डकैती के मुकदमे में उसे एक सिपाही की गवाही पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। सजा होने के बाद वह मैनपुरी जेल के बाद सेंट्रल जेल फतेहगढ़ और बरेली जेल में बंद रहा है। मानसिक रूप से दो बार बीमार होने पर उसको वाराणसी जेल में भी रहना पड़ा।
आजाद खान 24 साल बाद घर पहुंचा तो वहां का नजारा बदला हुआ था। भाई और भाभी उसके गले लगकर खूब राेए। बोले- यह न्याय की जीत है। हालांकि, उनमें खुशी के साथ नाराजगी भी है। आजाद के भाई मस्तान खान ने बताया कि गांव की रंजिश के चलते एक झूठे मुकदमे में युवावस्था तो जेल में ही गुजर गई। अब लगभग 50 साल के आजाद मेहनत-मजदूरी भी नहीं कर सकते हैं। न्याय मिलने में 24 साल का समय लग गया। आजाद की भाभी आयशा बेगम ने कहा कि ऊपर वाले के यहां देर तो है, लेकिन अंधेर कतई नहीं है। संवाद
खेत न मकान, कैसे कटेगी बाकी जिंदगी
आजाद ने बताया कि गांव की रंजिश के चलते डकैती के मुकदमे में झूठा फंसाया गया था। मानसिक रूप से तनाव में आने पर उसने परिवार को बिना बताए अपराध स्वीकार कर लिया था। उस समय शादी भी नहीं हुई थी। सजा होने के बाद उसको पहले फतेहगढ़ और बाद में बरेली सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। जब वह जेल से रिहा हुआ है तो उसके पास न तो रहने के लिए मकान है और न खेती के लिए जमीन है। उसकी आयु करीब 50 साल है। उसे चिंता है कि शेष जीवन कैसे कटेगा। उसने कहा कि सरकारी योजना के तहत उसे आवास और जीवन यापन के लिए भूमि दी जानी चाहिए।