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तीन तलाक बिल पास होने पर निदा खान बोलीं- औरतों को मिलेगा इंसाफ और दरिंदों को सजा

Wed, 31 Jul 2019 06:02 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बरेली
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तीन तलाक बिल अब बना कानून - फोटो : PTI
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आला हजरत हेल्पिंग सोसाइटी की अध्यक्ष निदा खान ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने पर खुशी जताते हुए कहा कि जिन महिलाओं ने तीन तलाक की लड़ाई लड़ी, उनके लिए यह एक बड़ी जीत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने की इच्छा देखकर ही मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट दिए। प्रधानमंत्री ने भी मुस्लिम महिलाओं से किया वादा अब पूरा कर दिया है। 

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निदा ने कहा कि सती प्रथा की तरह तीन तलाक भी मुस्लिम समाज की बड़ी कुप्रथा थी जो अब खत्म हो गई है। तीन तलाक कानून एक इंसानियत से जुड़ा मुद्दा है जिसका उन्होंने खुलकर समर्थन किया। चूंकि तीन तलाक देने का हक सिर्फ मर्दों को था इसलिए मुस्लिम औरतें घरों में डरी-सहमी रहती थीं। खौफ रहता था कि जाने कब और किस बात पर उन्हें तलाक दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले तीन तलाक के मामले आए दिन सामने आते थे। मगर तीन तलाक कानून की चर्चा होने के बाद ये मामले काफी घट गए। 

उन्होंने कहा कि अब लोग तीन तलाक बोलने से डरेंगे। औरतों को तीन तलाक और हलाला से तड़पाने वाले दरिंदों को सजा मिलेगी। कानून बनने से ज्यादा जरूरी है कि सजा हो। निदा का कहना है कि अगर यही कानून तीन-चार साल पहले बन गया होता तो उनका भी शीरान से तलाक नहीं होता। अगर तीन तलाक के पुराने मामले इस कानून के दायरे में आएंगे तो वह भी शीरान के खिलाफ केस दर्ज कराएंगी। 
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'आने वाली नस्लों को मिलेगी डर के आगे जीत'

मेरा हक फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी ने कहा कि तीन तलाक बिल राज्यसभा में पास होने की उन्हें बेपनाह खुशी है और वह इसे लफ्जों में बयान नहीं कर सकतीं। इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की बेहद शुक्रगुजार हैं जिन्होंने मुस्लिम औरतों का दर्द समझा और उससे उन्हें निजात दिलाने की लगातार कोशिश की। ये कोशिशें आखिरकार रंग लाईं। 

फरहत ने कहा कि लोकसभा में तीन तलाक बिल तीन बार पास हुआ। दो बार राज्यसभा में यह बिल अटक गया था। इस बार मुस्लिम महिलाओं ने काफी उम्मीद लगा रखी थी। आखिरकार यह उम्मीद पूरी हो गई। उन्होंने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ यह लड़ाई कामयाब होने के पीछे उन तमाम औरतों का संघर्ष है जिन्होंने अपनी जान हथेली पर रखकर जिद्दी और जुल्मी लोगों का सामना किया। इसी हौसले ने औरतों को यह ऐतिहासिक जीत हासिल कराई है। फरहत ने कहा कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनने से हमारी आने वाली नस्लों को एक बड़े डर से मुक्ति मिलेगी और वे खुलकर जिंदगी जी पाएंगी। तीन तलाक खत्म होने से पूरे मुस्लिम समाज को फायदा मिलेगा।

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'मुस्लिम औरतें शरीयत पर ही अमल करेंगी'

राष्ट्रीय सुन्नी उलमा कौंसिल के अध्यक्ष मौलाना इंतजार अहमद कादरी ने कहा कि तीन तलाक कानून इस्लामी शरीयत पर खुला हमला है। एक समझीबूझी प्लानिंग के तहत तीन तलाक के जरिये इस्लामी शरीयत में हस्तक्षेप किया जा रहा है। मुस्लिम महिलाओं से हमदर्दी की आड़ में तीन तलाक पर बिल पास कराना भारतीय संविधान के खिलाफ है। 30 लाख से भी ज्यादा गैर मुस्लिम महिलाएं बगैर तलाक के अपने पतियों से दूर रहने को मजबूर हैं, क्या उनकी हिमायत में कभी कोई बिल लाया गया। ऐसी महिलाओं से बेखबर लोग मुस्लिम महिलाओं से इतनी हमदर्दी क्यों जता रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि अगर हुकूमत की नीयत साफ है तो मुस्लिम महिलाओं की तालीम और रोजगार पर तवज्जो क्यों नहीं दी जाती। मॉब लिंचिंग की घटनाएं मुस्लिम पुरुषों से महिलाओं तक पहुंच गईं हैं। क्या उसके खिलाफ भी कोई कदम उठाया गया। तीन तलाक पर बेशक बिल पास हो गया, मगर अधिकतर महिलाएं शरीयत पर ही अमल करती हैं और हमेशा करेंगी।

'सियासी फैसला मगर कुछ फायदा भी होगा'

तंजीम उलमा इस्लाम के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का कहना है कि तीन तलाक पर बिल पास होना ही था क्योंकि केंद्र सरकार मुस्लिम महिलाओं के साथ हमदर्दी जताकर मुस्लिम समाज के कुछ वोट हासिल करना चाहती है जिसमें उसे कामयाबी मिल गई। इस बिल से बेशक नुकसान होंगे, मगर कुछ फायदे भी हो सकते हैं क्योंकि हर बुराई में भी कुछ अच्छाई का पहलू छिपा ही होता है। तीन तलाक एक साथ देना समाज के अंदर की बुराई थी। उलमा और मस्जिदों के इमाम बराबर आगाह करते रहे मगर समाज का एक बहुत बड़ा तबका इस पर अमल करता नजर नहीं आया। इसी की सजा पूरी कौम को मिली है। इस तरह अब देश में दो तरह के कानून का लोग पालन करेंगे। एक वह जो कुरान और हदीस के मुताबिक है और दूसरा वह जो संसद में पास किया गया। ऐसी सूरत में मुस्लिम समाज में बड़े पैमाने पर टकराव की सूरत पैदा होगी। बहरहाल हम संसद में पारित कानून का स्वागत करते हैं।
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