बरेली। रिछा बहरपुरा निवासी शराफत हुसैन (62) वृद्धावस्था पेंशन बंद होने से परेशान हैं। चिलचिलाती धूप में बुधवार को वह 50 किमी दूरी तय कर विकास भवन पहुंचे। बताया कि वह बेटे के साथ मजदूरी करते हैं। पहले पेंशन मिलती थी। अब नए नियमों का हवाला देकर उनसे शैक्षिक प्रमाणपत्र मांगा जा रहा है, जो उनके पास नहीं है। अब दूसरे विकल्प परिवार रजिस्टर की नकल के लिए उनको जद्दोजहद करनी होगी।
यह दिक्कत अकेले शराफत की नहीं, बल्कि जिले के 700 बुजुर्गों की है। श्यामगंज वृद्धा आश्रम में रह रहे तारा सिंह (70) की भी पेंशन नहीं आ रही है। वह दिव्यांग भी हैं। अब तक चार बार विभाग का चक्कर काट चुके हैं। नए नियमों की वजह से दिक्कत आ रही है। ऐसे बुजुर्ग अब विकास भवन से लेकर पंचायत व तहसील के चक्कर काट रहे हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु शेखर ने बताया कि नए नियकों के तहत वृद्धावस्था पेंशनधारक को शैक्षिक प्रमाणपत्र या परिवार रजिस्टर की नकल देना अनिवार्य है। इसके अभाव में 700 लोगों के आवेदन रद्द किए गए हैं। अभिलेख देने पर उनकी पेंशन चालू कर दी जाएगी।
ये भी हो रहे परेशान
जसौली के मुहीनुद्दीन (75) ने भी पेंशन के लिए आवेदन किया है। वह कक्षा आठ तक पढ़े हैं पर उनके पास शैक्षिक प्रमाणपत्र नहीं हैं। वह भी परिवार रजिस्टर के लिए भटक रहे हैं।नए नियमों ने सैनिक कॉलोनी निवासी भगवान दास (80) की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वह विभाग का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनको कोई कुछ स्पष्ट नहीं बता रहा है।