बरेली। बाजार में नेपाल से आयातित प्रतिबंधित रिफाइंड तेल का खुलेआम कारोबार और इससे होने वाली टैक्स चोरी का मामला ऊपर तक पहुंच गया है। केंद्रीय सीमा शुल्क एजेंसियाें ने इसे अपने रडार पर ले लिया है। इसके तहत कस्टम विभाग ने स्थानीय बाजार में अपना डेरा जमा लिया है। टीमों ने चिह्नित कारोबारियों के स्टॉक और अभिलेख खंगालने शुरू कर दिए हैं।
नेपाल से आयातित रिफाइंड इडेबल ऑयल से हर दिन करोड़ों रुपये के टैक्स की हेराफेरी हो रही है। मुनाफाखोर नेपाली तेल के नाम पर क्या बेच रहे हैं, इसकी छानबीन एफएसडीए विभाग ने अभी तक नहीं की है। इस बीच कस्टम और सीजीएसटी विभाग सक्रिय हो गए हैं। दोनों केंद्रीय एजेंसियों ने बरेली समेत कई प्रमुख बाजार अपने रडार पर ले लिए हैं। टीमों ने बरेली बाजार में डेरा डाल दिया है। इससे नेपाली तेल के कारोबारियों में हड़कंप है। सूत्रों ने बताया कि कस्टम टीमें नेपाल से अपने वाले इडेबल ऑयल का कारोबार करने वालों के स्टॉक और अभिलेख खंगाल रही हैं।
यह है मामला
भारत सरकार ने पिछले साल मलयेशिया और इंडोनेशिया देशों से पामऑयल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन मुनाफाखोर कारोबारियों ने नया रास्ता तलाश लिया। उन्होंने नेपाल में मलयेशिया के पॉमऑयल से तैयार हो रहे रिफाइंड ऑयल का आयात करना शुरू कर दिया। रक्सौल (बिहार) और गोरखपुर स्थित आयात लाइसेंसियों ने बरेली और अन्य जिलों में माल खपाना शुरू कर दिया। इसके बाद केंद्र सरकार ने विदेशी पामोमिन और पॉमोलिन रिफाइंड पर पिछले माह आठ जनवरी को रोक लगा दी, लेकिन धंधेबाज भी कम शातिर नहीं, उन्होंने सोयाबीन रिफाइंड नाम से उत्पाद आयात करना शुरू कर दिया। रक्सौल और गोरखपुर स्थित आयात लाइसेंसियाें ने माल खपाना जारी रखा। पिछले दिनों एक गोपनीय सूचना पर एफएसडीए के सहायक आयुक्त संजय पांडे ने जिला अभिहित अधिकारी धर्मराज के साथ श्यामगंज बाजार क्षेत्र में छापे मारे। यहां अशोक कुमार सुमित कुमार और लालचंद एग्रो फर्मों पर नेपाली सोयाबीन रिफाइंड का स्टॉक मिला। टीम ने इसके नमूने भरकर तीन सौ टिन सीज कर दिए। एफएसडीए ने अभी नेपाली रिफाइंड ऑयल की रिपोर्ट जारी नहीं की है। इस बीच एफएसडीए ने लालचंद के अवैध स्टॉक को वैध ठहराने के लिए दो परिसरों के पंजीकरण कर दिए।