टेरर फंडिंग मामले की विवेचना कर रहा एटीएस (एंटी टेररिज्म स्क्वॉड) अब नेपाल में बैठे आतंकियों के मददगारों की तलाश में जुट गया है। एटीएस का पहला मकसद नेपाल में बैठे उन लोगों का पता लगाना है जो दूसरे देशों से नेपाल के बैंक में रुपये मंगाते थे।
रविवार को यहां पहुंचने के बाद एटीएस की टीम ने विवेचना के प्रारंभिक तथ्यों को जुटाने के लिए पलिया बस अड्डे के निकट उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां से चारों आरोपियों को गिरफ्तार बताया गया था।
नेपाल को अड्डा बनाकर आतंकियों को रकम पहुंचाने वाले गिरोह का शुक्रवार को पर्दाफाश बरेली के इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गांव परतापुर चौधरी निवासी उम्मेद अली, समीर सलमानी और तिकुनियां (लखीमपुर खीरी) निवासी संजय अग्रवाल व बदालपुरवा (तिकुनियां) के एराज अली को गिरफ्तार किया था। इसमें एटीएस का भी सहयोग था।
टेरर फंडिंग के इस मामले की रिपोर्ट थाना निघासन में दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना डीजीपी ने यूपी एटीएस को सौंप दी थी। यूपी एटीएस की सात सदस्यीय टीम सीओ शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में रविवार सुबह करीब 11.30 बजे लखीमपुर खीरी जिला मुख्यालय पहुंची।
करीब आधे घंटे रुकने के बाद टीम निघासन रवाना हो गई। टीम ने निघासन के सीओ राकेश कुमार नायक और प्रभारी निरीक्षक के साथ करीब दो घंटे तक थाना पर बैठक की। सूत्रों के मुताबिक बैठक में नेपाल में बैठे आतंकियों के मददगारों की गिरफ्तारी के लिए रणनीति बनाई गई।
इसके बाद विवेचना के प्रारंभिक तथ्यों को जुटाने के लिए पलिया पहुंची टीम ने वहां बस अड्डे के मैनेजर राजकुमार, व्यापारी बबलू, हसीब हसीब, लक्ष्मण भगत सहित छह लोगों के बयान दर्ज किए। सीओ निघासन ने गिरफ्तारी स्थल का नक्शा आदि बनाकर एक फाइल एसटीएस को सौंपी।