बरेली। बुधवार सुबह आईवीआरआई से जारी रिपोर्ट में पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल और उनकी पत्नी के साथ बेटा-बहू और पोते में संक्रमण की पुष्टि होते ही स्वास्थ्य विभाग में खलबली मच गई। स्वास्थ्य विभाग ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि पूर्व वित्त मंत्री के पड़ोस में ही दो दिन पहले ही संक्रमित मिले कारोबारी का उनके परिवार में आना-जाना था। अनुमान लगाया जा रहा है कि उसी के जरिये उनके परिवार तक संक्रमण पहुंचा। अब संक्रमित परिवार के संपर्क में आने वाले और लोगों चिह्नित किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक कालीबाड़ी का कारोबारी संक्रमण की पुष्टि होने तक लगातार पूर्व वित्त मंत्री के घर आता-जाता रहा था। उसके संक्रमित होने के बाद एहतियातन ही राजेश अग्रवाल और उनकी पत्नी की लखनऊ और उनके बेटे-बहू और पोते की आईवीआरआई लैब में जांच कराई गई। संक्रमित होने की पुष्टि के सभी को कोविड एल-2 अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार के भतीजे ने तबीयत खराब होने पर कारपोरेट लैब में जांच कराई थी। मंगलवार की देर रात उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। उसे भी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
राजेश के इलाज में जुटी अलग टीम
पूर्व वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल और उनके परिवार को कोविड एल-2 अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। इस वार्ड में आने-जाने का रास्ता दूसरे वार्डों से अलग है। डॉक्टरों और स्टाफ की अलग से एक टीम पूर्व वित्तमंत्री और उनके परिवार के इलाज तथा देखभाल के लिए लगाई गई है।
कोरोना संक्रमित मिलने पर पूर्व वित्त मंत्री के परिवार को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया है। शहर विधायक के भतीजे की रिपोर्ट भी पॉजिटिव मिली है। दोनों ही इलाके सील किए गए हैं। इनके संपर्क में आए लोगों को भी क्वारंटीन कराया है। - डॉ. विनीत शुक्ल, सीएमओ
बाबू संक्रमित, सीएमओ दफ्तर 24 घंटे के लिए सील
एक बाबू और उनके बेटे की रिपोर्ट बुधवार को पॉजिटिव आने के बाद सीएमओ कार्यालय को भी 24 घंटे के लिए सील कर दिया गया है। बताया जाता है कि संक्रमित मिले बाबू की तबीयत कई दिनों से खराब थी। उन्होंने अपना और अपने बेटे का सैंपल कराया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। सीएमओ डॉ. विनीत शुक्ल ने संपर्क में आने वाले सभी कर्मचारियों की जांच के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो
इस्तेमाल के बाद अस्पताल में ही फेंक दीं पीपीई किट
तीन सौ बेड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पर जांच कराने पहुंचे मरीजों में फैली दहशत
बरेली। कोरोना संक्रमण बढ़ने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के स्टाफ की लापरवाही कम नहीं हो रही। बुधवार को कर्मचारियों ने इस्तेमाल के बाद एक पीपीई किट उसे परिसर में ही फेंक दी। फ्लू कॉर्नर पर जांच कराने आए मरीजों ने हल्ला मचाया तो किट को डिस्पोज कराया गया। तीन सौ बेड अस्पताल में बुधवार को किसी कर्मचारी ने पीपीई किट को खुले में फेंक दिया। अस्पताल में कोविड टेस्ट कराने पहुंचे मरीजों ने खुले में पड़ी पीपीई किट देखी तो सकते में आ गए। उन्होंने तत्काल अस्पताल इंचार्ज डॉ. अजमेर सिंह से शिकायत की। उन्होंने स्टाफ पर नाराजगी जताते हुए किट को मेडिकल वेस्ट के डस्टबिन में डालने को कहा ताकि उसे डिस्पोज कराया जा सके। साथ ही दोबारा ऐसी लापरवाही पर कार्रवाई की संस्तुति करने की चेतावनी भी दी। ब्यूरो
कोविड अस्पताल में व्यापारी नेता की भूख हड़ताल
निजी खर्च पर भर्ती होने के बावजूद सुविधाएं न देने का लगाया आरोप, जांच शुरू
बरेली। दो दिन पहले संक्रमित मिले ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने बुधवार को वीडियो वायरल कर एल-2 कोविड अस्पताल में समय पर खाना और दवा न देने का आरोप लगाया और भूख हड़ताल शुरू कर दी। सीएमओ ने अस्पताल प्रबंधन से बात कर उन्हें सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए। कोविड अस्पतालों की निगरानी के लिए भेजे गए नोडल अफसर आरएनएस यादव ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है।
ट्रांसपोर्टर ने सोशल मीडिया पर वायरल किए वीडियो में आरोप लगाया कि वह निजी खर्च पर मेडिकल कॉलेज के प्राइवेट वार्ड में भर्ती हैं। यहां कोरोना संक्रमितों को कोई सुविधा नहीं दी जा रही है। न उन्हें समय पर नाश्ता मिल रहा है न दवा दी जा रही है। स्टाफ का रवैया भी बेहद खराब है। कोई डॉक्टर हालचाल तक पूछने नहीं आता है। उनके भूख हड़ताल शुरू करने के बाद सुविधाएं मुहैया कराई जाने लगीं।
उधर, नोडल अफसर आरएनएस यादव ने बताया कि उन्होंने इस प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। व्यापारी नेता से बात कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। अस्पताल की कोई लापरवाही मिली तो रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।