फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bareilly News: गर्भावस्था में बेपरवाही जान पर भारी... छह माह में 12 की मौत

विज्ञापन
विज्ञापन
सात गर्भवती की कार्डियक अरेस्ट, तीन की पीपीएच, दो की सेप्टीसीमिया से हुई मौत, छह शिशुओं की भी गई जान
विज्ञापन

बरेली। गर्भधारण के दौरान जाने-अनजाने में सेहत के प्रति बेपरवाही जच्चा-बच्चा की जान पर भारी पड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ाें पर गौर करें तो छह माह में 12 गर्भवती और छह शिशुओं की मौत प्रसवकाल या प्रसवोत्तर हुई है। सात गर्भवती की जान दिल का दौरा पड़ने से गई।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अस्पताल में सामान्य प्रसव के बाद प्रसूता को नियमानुसार दो दिन और सिजेरियन प्रसव के बाद पांच दिन तक चिकित्सकों की निगरानी में रहना चाहिए। वर्ष 2025-26 में अब तक 14,252 संस्थागत प्रसव हुए। 848 प्रसूता दो दिन के भीतर ही घर चली गईं। इसी दौरान सात गर्भवती की कार्डियक अरेस्ट, तीन की प्रसवोत्तर रक्तस्राव, दो की सेप्टीसीमिया से मौत हुई।
विज्ञापन

महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. त्रिभुवन प्रसाद के मुताबिक डॉक्टर के परामर्श बगैर घर नहीं जाना चाहिए। सिजेरियन प्रसूता इस गंभीरता को समझती हैं, पर सामान्य प्रसव में गर्भवती के परिजन बिना बताए भी घर लौट जाते हैं। जल्दबाजी में चले जाने से सभी जांचें नहीं हो पाती। जटिलता नियंत्रण कठिन होता है।

नियमित एएनसी जांच न होना हृदयाघात की वजह
महिला चिकित्साधिकारी डॉ. मधु गुप्ता के मुताबिक, नियमित अंतराल पर गर्भवती की एनीमिया, हाइपरटेंशन, शुगर, थॉयराइड, लिपिड प्रोफाइल आदि जांचें होती हैं। जिससे संभावित खतरे का समय रहते पता चल जाता है। नौ माह के दौरान चार बार एएनसी जांच जरूरी है। जो गर्भवती नियमित जांच या जरूरी दवा का कोर्स या टीके नहीं लगातीं, उनकी जान का जोखिम होता है। जो गर्भस्थ शिशु के लिए भी खतरा है।

प्रसव के 48 घंटे बाद तक रहता है पीपीएच खतरा
वरिष्ठ महिला चिकित्सक डॉ. श्वेता भारद्वाज के मुताबिक सिजेरियन प्रसव के करीब सप्ताह भर तक प्रसवोत्तर रक्तस्राव, हाइपरटेंशन, सेप्सिस की आशंका रहती है। इसलिए प्रसूता को दो दिन अस्पताल में रहने के लिए कहते हैं, ताकि संभावित खतरों का आकलन हो सके। अगर गर्भाशय न सिकुड़े तो रक्त वाहिकाओं से खून बहता रहता है। उच्च रक्तचाप, गर्भाशय का फैलाव, रक्त का थक्का बनने में कठिनाई पीपीएच की वजह है।
विज्ञापन


कब, किन प्रसूताओं की हुई मौत
कार्डियक अरेस्ट: 20 अप्रैल को कल्याणपुर की विमला, 27 अप्रैल को कटघर किला की रोली गुप्ता, 21 जून को गिरधरपुर की कीर्ति, 12 अगस्त को आंवला की शहनाज, 12 अगस्त को चंदपुर की ओमवती, 27 जून को ठिरिया की रीना, चार सितंबर को कैरमनगर की विद्या देवी की मौत।
प्रसवोत्तर रक्तस्राव: 10 अप्रैल को बसुधरन जागीर की नाजरीन, 22 जून को खमरिया की माया देवी, नौ जुलाई को अमरोली की पिंकी की मौत।
सेप्टीसीमिया: 10 अप्रैल को भौआपुर की फूलबानो, 11 मई को नवदिया की राधा की मौत। ब्यूरो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें