बरेली। पहले उत्तर प्रदेश फिर उत्तराखंड के विकास का खाका खींचने वाले दोनों राज्यों के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को लोगों ने विकास पुरुष के नाम से नवाजा। केंद्रीय मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में वह पूरे देश को ध्यान में रख कर कुछ नया सोच रहे थे। बहुत लोगों को नहीं पता कि ओवर लोडेड हो रही देश की राजधानी को संबल देने के लिए नोएडा, ग्रेटर नोएडा और ट्रोनिका सिटी की परिकल्पना एनडी तिवारी की ही थी। लखनऊ का गोमतीनगर और इंदिरानगर भी तिवारी जी की देन है। उत्तराखंड को जब तिवारी जी मिले तो माहौल ऐसा बना कि यूपी के उद्योग वहां शिफ्ट होते गए। अब भी लोग कहते हैं कि विकास का विजन तो तिवारी जी के पास था। 18 अक्टूबर को 90 साल के हो रहे तिवारी अपना जन्म दिन इस बार हल्द्वानी में मना रहे हैं। तिवारी जी कहते हैं जितना हो सका किया लेकिन बहुत कुछ रह गया। उनके मन में कसक है कि वह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पर्यटन और परिवहन विकास की योजनाओं को अंतिम रूप नहीं दे पाए। तिवारी जी ने हमेशा वक्त की रफ्तार देख कर भविष्य की योजनाएं बनायी आज वह कहते हैं कि हमें नई तकनीक पर ध्यान देना चाहिए। एनडी तिवारी शुक्रवार को बरेली में रुकने के बाद हल्द्वानी पहुंचे। अमर उजाला ने दोनों जगह उनसे लंबी बात की। प्रस्तुत हैं कुछ अंश
पर्यटन की असीम संभावनाएं
विकास जनता की जरूरत के अनुसार होना चाहिए। पर्यटन विकास और द्रुत परिवहन पर ज्यादा काम न कर पाने का अफसोस है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं। ताजमहल वाले आगरा को पर्यटन नगरी के रूप में और ज्यादा विकसित किया जा सकता है। समय मिला होता तो प्रदेश के कई नगरों को पर्यटन मॉडल बनाते। भौगोलिक परिदृश्य के मुताबिक उत्तराखंड को विकास मॉडल बनाने के लिए अभी काफी गुंजाइश है। वहां ऐसा विकास किया जाना चाहिए कि उत्तराखंड के निवासी पलायन करने के बारे में भी न सोचें। उद्योगों के विकास के लिए उन्होंने छोटी सी कोशिश की, जिसे और आगे बढ़ाया जा सकता है। उत्तराखंड आज किसी भी विकसित राज्य से पीछे नहीं है। आंध्र में आने वाले तूफानों से बचने के लिए देहरादून में काम हो रहे हैं। यह बड़ी बात है।
पीएम न बन पाने की कसक तो है
केंद्र सरकार में विदेश, संचार, श्रम, उद्योग, वाणिज्य मंत्रालय संभालने और योजना आयोग के उपाध्यक्ष जैसे अहम पदों पर काम करने वाले नारायण दत्त तिवारी को प्रधानमंत्री न बनाने की कसक आज तक है। उन्होंने बेबाकी से इसे स्वीकार किया और कहा कि दिलीप कुमार के नाम के चलते बहेड़ी की जनता ने उन्हें वोट नहीं दिया और वह नैनीताल से लोकसभा चुनाव हार गए। अगर उसे जीत जाते तो पीएम बन जाते। बहेड़ी विधानसभा तब नैनीताल विधानसभा में आती थी और मेरे लिए जनसभा करने अभिनेता दिलीप कुमार आए थे। उनके असली नाम की गलतफहमी में कई वोट छिटक गए और मैं पांच हजार वोटों से हार गया।
मोदी-अखिलेश कर रहे हैं कुछ अच्छे काम
तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली और अब तक के कुछ कामों को अच्छा बताया तो यह भी कहा कि उन पर आरएसएस का दबाव है। बोले भारतीय संविधान मजबूत है और मोदी सशक्त हैं। वह बेहतर समन्वय स्थापित कर काम कर लेंगे। मैंने उनसे विदेश घूम कर आने के बाद कहा कि इतने दौरे कहां पचा पाओगे। इन अनुभवों को देश के विकास में लगाओ। तिवारी ने यह भी कहा कि मोदी को अपने मन की बात कहने से पहले देश का मन समझना चाहिए। उप्र में अखिलेश यादव भी अच्छा काम कर रहे हैं। उनमें ऊर्जा है और वह ऊर्जावान लोगों को मौका दे रहे हैं। हालांकि अभी और काम की जरूरत है।
राजा बन कर काम नहीं होता
तिवारी जी खुद को विकास पुरुष कहने पर भी आपत्ति करते हुए कहते हैं मैं सेवक हूं। सही मायने में जनप्रतिनिधि जनता के सेवक हैं। वह इसी रूप में सेवा करे तभी देश-प्रदेश और समाज का भला हो सकता है। आजादी के बाद लोकतंत्र स्थापना की अवधारणा राजशाही खत्म कर ऐसे राज्य की कल्पना की थी, जिसमें कुर्सी पर बैठने वाले जनता के सेवक के रूप में काम करें। अगर हम खुद को राजा समझकर काम करेंगे तो यह लोकतंत्र के सिद्धांत के विपरीत होगा।
नई तकनीक से होगा विकास
यूपी और उत्तराखंड में औद्योगिक विकास की गति में अंतर दूर करने के लिए सरकारों को वैश्विक समाजवाद और उच्च तकनीक अपनानी होगी। बड़ी कंपनियों से समस्या नहीं है, समस्या काम के तरीके से है। अमेरिका ने अपने यहां विश्व के विभिन्न औद्योगिक समूहों को जगह देकर अपना विकास किया। चीन आज दुनिया के हर बाजार का नकली माल तैयार कर रहा है। यानी उन्होंने कई धाराओं को एक ही स्थान पर जगह दे दी। हमें भी आपसी समन्वय के आधार पर ही विकास करना होगा। पहाड़ी इलाकों में डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनानी चाहिए। जो टेक्नोलॉजी आज अमेरिका, स्वीडन, इंग्लैंड जैसे आधुनिक देशों में है, हमारे यहां भी आनी चाहिए।