पहली जून को विजय जुलूस निकालकर कोतवाली के एक ऊंचे चबूतरे पर खान बहादुर खान की ताजपोशी कर उनको बरेली का नवाब घोषित कर दिया गया था।
यहां बख्त खां ने आंदोलनकारी सेनाओं का सेनापतित्व स्वीकार कर लिया। खान बहादुर खान ने शोभाराम को दीवान बनाया था। इस क्रांति में अध्यापक कुतुबशाह का भी बड़ा योगदान था। क्रांति के दौरान जितने भी इश्तेहार प्रकाशित हुए, उन सब पर कुतुबशाह का नाम दर्ज होता था।