बरेली। पीडब्ल्यूडी के अभियंताओं ने नाथ कॉरिडोर के अंतर्गत धोपेश्वरनाथ मंदिर के सामने सड़क बनवाई, लेकिन उसके ढलाव पर ध्यान नहीं दिया। अब मंदिर के द्वार पर बारिश के बिना ही जलभराव हो रहा है। इस वजह से इंजीनियरिंग पर सवाल उठ रहे हैं।
नाथ कॉरिडोर के तहत 11 मार्गों के 15.64 किलोमीटर हिस्से के लिए 43.95 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। धोपेश्वरनाथ मंदिर के सामने की सीसी सड़क भी इसमें शामिल थी। यही सड़क युगवीणा लाइब्रेरी, बदायूं रोड होते पुलिस बूथ तक तक जाती है। साढ़े छह करोड़ रुपये से सड़क के 1.80 किलोमीटर हिस्से का नवीनीकरण कराया गया, पर जलनिकासी पर ध्यान नहीं दिया गया। जेई का दावा है कि एस्टीमेट के अनुरूप सड़क बनाई गई है। जब शनिवार दोपहर लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार को जलभराव की तस्वीरें दिखाई गईं तो उन्होंने कहा कि अब वह खुद मौके पर जाकर देखेंगे। निर्माण की गुणवत्ता भी परखी जाएगी।
एनओसी में अटका चौड़ीकरणसुभाषनगर पुलिया से तपेश्वरनाथ मंदिर तक 1.29 किलोमीटर लंबे मार्ग का चौड़ीकरण अटक गया। यह मार्ग जंक्शन के पीछे स्थित रेलवे कॉलोनी से होकर गुजरता है। जब टेंडर निकाले गए तो लोक निर्माण विभाग ने रेलवे से अनापत्ति मांगी थी। इस पर रेलवे ने एलाइनमेंट बदलने के लिए कहा। तर्क दिया गया कि रेलवे लाइन का विस्तार हो सकता है। इसलिए मौजूदा एलाइनमेंट पर अनुमति नहीं दी जा सकती। अब एलाइनमेंट बदलकर ड्राइंग भेजी गई है। इसकी भी एनओसी अटकी हुई है।
सड़क के निर्माण के दौरान ढलाव पर ध्यान नहीं दिया गया। अगर अभियंता इसका ध्यान देते तो जलभराव नहीं होता। एस्टीमेट में ही जलनिकासी का भी इंतजाम होना चाहिए, लेकिन मौका देखकर ऐसा नहीं लगता है। - राजेंद्र आर्य, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता