यहां स्थापित होंगे ओम और त्रिशूल
अलखनाथ द्वार के पास ही धरातल से 12 फीट ऊंचाई पर ओम का प्रतिरूप स्थापित किया जाएगा। मुरादाबाद के पीतल कारीगर आठ फीट ऊंचीं ओम की आकृति तैयार कर रहे हैं। चार फीट के स्टैंड में उसे फिट किया जाएगा। नरियावल पर महादेव के प्रतीक स्वरूप त्रिशूल को स्थापित किया जाएगा। लखनऊ की ओर से आने वाले लोग भगवान आशुतोष के त्रिशूल व ओम के दर्शन कर अलखनाथ द्वार से शहर में प्रवेश करेंगे।
रामगंगा के किनारे 17 एकड़ में बनेगी नाथ वाटिका
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल ने बताया कि राम गंगा के किनारे 17 एकड़ में नाथ वाटिका तैयार की जाएगी। इसमें वॉकिंग प्लाजा बनेगा। सुंदर पुष्पों से युक्त पौधों का रोपण किया जाएगा। औषधीय पौधे भी नाथ वाटिका की शान बनेंगे। वॉकिंग प्लाजा में लोग मॉर्निंग और इवनिंग वाक का आनंद ले सकेंगे।
इसके अलावा उनके बैठने के लिए बेंच की भी व्यवस्था की जाएगी। नदी के किनारे का इको सिस्टम को व्यवस्थित रखने के लिए ग्रीन वाटिका को बढ़ावा दिया जाएगा। नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के अनुकूल नाथ वाटिका को विकसित किया जाएगा।
डेलापीर पर लगेगा शिव का डमरू
बीडीए उपाध्यक्ष जोगिंदर सिंह ने बताया कि डेलापीर चौराहे को सांस्कृतिक धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। डेलापीर चौराहे पर भगवान शिव का प्रतीक डमरू स्थापित होगा। इसके अलावा एक फोक वॉल (दीवार) का निर्माण कराया जाएगा।
दीवार पर बरेली की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को अंकित किया जाएगा। डेलापीर चौराहे के पास सिक्स लेन रोड और सौ फुटा रोड पर सेल्फी प्वाइंट दिए जाएंगे। धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूपों के साथ लोग सेल्फी ले सकेंगे। सेल्फी देखते की आसानी से समझ आएगा कि हम नाथ नगरी बरेली में हैं।