निशांत का जन्मदिन मनाते चिकित्सक।
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बरेली। नहरों, तालाबों और सरकारी जमीनों पर माफिया के कब्जे रोकने के लिए चाहे जितने कड़े कानून बना लिए जाएं, लेकिन जब तक सिस्टम नहीं सुधरेगा, कुछ होने वाला नहीं है। शहर में नकटिया नदी की हालत को देखते हुए यही लगता है। यहां सिस्टम भूमाफिया का साथ देता दिख रहा है। डोहरा रोड पर यूनिवर्सिटी के पीछे नकटिया नदी के पुल के पास काश्तकारों के खेतों की खुदाई कर नदी का रुख बदलने के मामले में तहसील प्रशासन ने क्लीन चिट दी तो माफिया के हौसले और बढ़ गए हैं। कई जगह सूख चुकी नदी की जमीन पर कब्जों का खेल शुरू हो गया है। जहां नदी में पानी है, वहां उसे पाटने का काम होने लगा है। एक बिल्डर ने सैकड़ों क्विंटल मिट्टी नदी में डाल दी है, जबकि बाढ़ खंड ने नवंबर में ही लाखों रुपये खर्च कर नदी की सफाई कराई थी। नदी में मिट्टी के ढेर लगने से धारा प्रभावित हो रही है। साथ ही अवैध कब्जे की आशंका जाहिर की जा रही है। फिलहाल अफसरों ने इस मामले का कोई संज्ञान नहीं लिया है।
डोहरा रोड पर नकटिया नदी पुल के पास के कुछ काश्तकारों ने तहसील के अधिकारियों से शिकायत की थी कि बाढ़ खंड के स्टाफ ने माफिया के इशारे पर नदी की सफाई के नाम पर जेसीबी से उनके खेतों की खुदाई कर दी है। इससे नदी की मूल धारा का रुख भी बदल गया है। तहसीलदार आशुतोष गुप्ता ने टीम को मौके पर भेजकर जांच कराई। इसमें लेखपालों ने चंदपुर बिचपुरी के पीड़ित किसानों के बयान और उनके खेतों की पैमाइश के बाद यह रिपोर्ट दे दी कि नदी के प्रवाह की दिशा नहीं बदली गई है। इस जांच पर किसानों ने सवाल उठाते हुए दूसरी बार डीएम नितीश कुमार से शिकायत की। किसानों का कहना है कि नदी का रुख नहीं बदला है तो उनके खेतों का रकबा कहां गुम हो गयौ? उधर, इस प्रकरण में प्रशासन की क्लीन चिट मिलने के साथ ही नकटिया नदी के पास ही निजी निर्माण कार्य शुरू हो गया है। निर्माण स्थल के पास ही खुदाई से निकली सैकड़ों क्विंटल मिट्टी के ऊंचे ढेर नदी के अंदर ही लगा दिए गए हैं, जबकि बाढ़ खंड ने कुछ दिन पहले ही लाखों रुपये खर्च कर नदी की सफाई कराई थी। नदी को पाटने का खेल कई दिनों से चल रहा है, लेकिन प्रशासन और बाढ़ खंड के अधिकारियों ने इसमें कार्रवाई तो दूर अवैध रूप से मिट्टी डालने पर भी प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। नदी में मिट्टी से इस तरह गुपचुप भराव कर कब्जा करने की योजना बनाने की आशंका आसपास के लोगों ने जाहिर की है।
बाढ़ खंड ने भी खुदाई कर मिट्टी नदी के पास ही छोड़ी
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद नदी की सफाई के लिए बाढ़ खंड को करीब 15 लाख रुपये मिले थे। हालांकि बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने डोहरा रोड पर नदी की सफाई के लिए करीब दो लाख रुपये ही खर्च किए हैं। गौरतलब है कि नदी का प्रवाह ठीक करने के नाम पर जेसीबी से मिट्टी की खुदाई कर उसे नदी से बाहर करने के बजाय वहीं छोड़ दिया गया है। इससे बारिश में यह मिट्टी फिर से नदी में बह जाएगी।
बीडीए तक मामला पहुंचने पर सचिव ने बैठाई जांच
यूनिवर्सिटी के पीछे डोहरा रोड पर पुल के पास चल रहे निर्माण कार्य की सूचना बीडीए सचिव अमरेश कुमार तक पहुंच गई है। उन्होंने इस मामले में क्षेत्रीय जेई अजय गर्ग को बुलाकर भी पूछताछ की लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस निर्माण की बीडीए से स्वीकृति मिली है या नहीं। सचिव ने बीडीए की टीम को मौके पर पहुंचकर निर्माण की जांच करने और अवैध निर्माण मिलने पर उसे रुकवाने के निर्देश दिए हैं।