बरेली। निशांत गंगवार को उसके अपने मम्मी-पापा ने तो छोड़ दिया लेकिन कुदरत ने उसे ममता की छांव से दूर नहीं होने दिया। एसआरएमएस की नर्स अर्चना गंगवार ने उसकी मां की जिम्मेदारियां संभाल लीं। अब निशांत उन्हीं की आवाज पर कोई प्रतिक्रिया देता है। अर्चना को देखते ही उसके चेहरे पर मुस्कराहट खिल जाती है। अर्चना सुबह से शाम तक पांच बार डाइट चार्ट के हिसाब से उसे खाना खिलाती हैं और उसका पूरा ख्याल रखती हैं। एसआरएमएस का स्टाफ हर साल धूमधाम से उसका जन्मदिन भी मनाता है।
अर्चना ने बताया कि निशांत जब शुुरू में आया था तो इस तरह शांत नहीं रहता था। उसका शरीर काम नहीं कर रहा था, लेकिन वह कमरे में अपनों को तलाशता रहता था। अब भी कुछ बोल नहीं पाता है, लेकिन अर्चना उससे बात करती हैं तो वह जोर से चिल्लाते हुए हंसने की कोशिश करता है। अर्चना ने बताया कि एक-दो घंटे के अंतराल में उसकी करवट भी बदलनी पड़ती है। यदि ऐसा न करें तो वह रोने लगता है। इसके अलावा सप्ताह में कम से कम दो बार उसे व्हील चेयर पर बैठाकर ग्राउंड में घुमाते हैं, जिससे उसे बदला हुआ माहौल मिल सके। इसके अलावा उसके नाखून काटने, बाल कटवाने इन सभी का ध्यान रखना पड़ता है। इसके अलावा दिन में तीन बार उसकी फिजियोथेरेपी होती है। कहा कि पहले निशांत में परिवार के लिए एक छटपटाहट देखी जाती थी। वह परेशान मालूम होता था, लेकिन अब करीब एक साल से शांत रहता है।
प्रशासन नोडल अफसर तय करे प्रशासन
बरेली। एसआरएमएस में निशांत का इलाज चल रहा है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन चाहता है कि प्रशासन मामले को संज्ञान में ले और किसी को नोडल अफसर नियुक्त करे, जिससे नोडल अफसर जब चाहें निशांत का हाल जान सकें और उन्हें अस्पताल की ओर से स्टेटस रिपोर्ट भी दी जाए। अभी अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी हर माह निशांत गंगवार की स्टेटस रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय भेज रहे हैं। प्रबंधन का कहना है कि इलाज और देखरेख की जिम्मेदारी अस्पताल हमेशा ही उठाता रहेगा। बताया कि इस बारे में वह एक बार जिला प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं और जल्द डीएम से मुलाकात करेंगे। डीएम नितीश कुमार ने कहा कि वह मामले को जिला प्रोबेशन अधिकारी से दिखवाएंगे। जिला प्रशासन से जो भी सहयोग हो सकेगा किया जाएगा।
माता-पिता आएं, हम स्वागत करेंगे
एसआरएमएस ट्रस्ट के सचिव आदित्य मूर्ति ने कहा कि निशांत के माता-पिता आएं तो वह उनका स्वागत करेंगे। निशांत को उसके परिवार के प्यार की जरूरत है। प्यार मिले तो शायद उसमें कुछ भाव जगे और वह तेजी से रिकवर कर सके। अस्पताल निशांत का इलाज करता रहेगा।