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नकटिया नदी के उद्धार को प्रवासी मजदूर बनेंगे भगीरथ

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बरेली। शहर के पास से बह रही सदानीरा नकटिया नदी अवैध कब्जों और अन्य कारणों से मृतप्राय होती जा रही है। हाल में एसडीएम सदर ने नकटिया नदी के सर्वे में तमाम जगहों पर कब्जे चिह्नित किए थे। शहर की कभी लाइफ लाइन रही इस नदी को दोबारा जिंदा करने के साथ मजदूरों को काम देने के लिए प्रशासन और विकास विभाग ने मिलकर कार्ययोजना तैयार की है। कोशिश की जा रही है कि मनरेगा के माध्यम से नदी की खुदाई कर उसे पुराने स्वरूप में वापस लाया जाए।
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कभी इस नदी का पानी सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करने के साथ ही कई गांवों के लोगों की प्यास बुझाता था, लेकिन माफिया ने अधिकारियों से साठगांठ कर कई जगह मिट्टी डालकर कब्जे कर लिए। इससे नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने से वह सूख गई है। काश्तकारों की शिकायत के बाद राजस्व विभाग की टीम ने सर्वे में कई जगहों पर अवैध कब्जा चिह्नित भी किया था। नदी का पीलीभीत रोड पर खजुरिया घाट से होते हुए डोहरा रोड, यूनिवर्सिटी और ग्रीन पार्क के पीछे से होते हुए मोहनपुर ठिरिया तक सर्वे किया गया। अवैध कब्जा होने से नदी का प्रवाह नहीं हो रहा है। अब महामारी के संकट में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर वापस आ गए हैं। इन्हें मनरेगा के तहत रोजगार के अवसर दिए जा रहे है। डीएम नितीश कुमार ने सीडीओ चंद्रमोहन गर्ग के साथ नकटिया नदी सहित कई और नदियों के कायाकल्प की प्लानिंग बनाई है। इसमें प्रवासी मजदूरों का लगाकर नदी से मिट्टी हटवाने सहित कई काम कराने की कार्ययोजना पर अमल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इससे नदी का प्रवाह वापस पुराने स्वरूप में आने के साथ लौटकर आए मजदूरों को काम भी मिल सकेगा।
प्रवासी मजदूरों को काम देने की कार्ययोजना विकास विभाग के साथ बनाई जा रही है। इसमें नकटिया नदी को भी शामिल किया जा रहा है। कोशिश है कि मानसून आने से पहले इस काम को काफी हद तक पूरा कर लिया जाए। - नितीश कुमार, डीएम
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