फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तो ये शहर अतिक्रमण मुक्त है!

Sun, 03 May 2015 01:27 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
अवैध कब्जों से भले ही शहर की प्रमुख सड़कों से लेकर गलियां तक घिरी हैं लेकिन नगर निगम के अफसरों ने शासन को एक रिपोर्ट भेजकर अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी से मुक्ति पा ली है। नगर निगम की इस रिपोर्ट के मुताबिक अब शहर में स्थायी अतिक्रमण के नाम पर कुछ मंदिर और मस्जिद ही बचे हैं जिन्हें इसलिए नहीं हटाया गया क्योंकि इससे माहौल खराब होने की आशंका है।
विज्ञापन

नगर निगम ने शहर में पिछले साल 2389 अस्थाई और 205 स्थाई अतिक्रमण चिह्नित किए हैं। शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें बताया गया कि मार्च तक सभी अस्थाई अतिक्रमणों में सिर्फ 25 बचे हैं। इसके अलावा 39 स्थाई अतिक्रमण हटाए गए हैं। बाकी जो 116 अतिक्रमण बचे हैं वे मंदिर, मस्जिद या अन्य धर्म स्थलों के हैं जिन्हें माहौल खराब होने की आशंका से नहीं हटाया गया। आखिरी कालम में धार्मिक अतिक्रमणों की संख्या 118 बतायी गई है यानी इनमें से भी कोई दो शहर से हट चुके हैं। इस वित्तीय वर्ष में  शहर में 10 मार्गों से अतिक्रमण हटाने के लिए नगर निगम ने 21 अप्रैल से सात मई तक की कार्ययोजना बनाई थी। यानी या तो पिछले साल ठीक से अतिक्रण चिह्नित ही नहीं किए या फिर अचानक ही शहर में अक्रिमण हुआ है। इस दौरान दो-तीन मार्गों पर ही अतिक्रमण हटाने की खानापूरी की गई। पीलीभीत बाईपास पर सिर्फ एक दिन सेटेलाइट से बजरंग ढाबा तक अतिक्रमण हटाया गया। पुलिस और प्रशासनिक अमला लेकर नगर निगम की टीम ने कुछ अतिक्रमण हटाया लेकिन अगले ही दिन ये अतिक्रमण फिर बहाल हो गया। अब फिर इस रोड पर कार बाजार के साथ ट्रक, बस और दूसरे निजी वाहनों का जमघट लगा हुआ है। अभियान के दौरान हटाए गए ठेले, खोखे और टेंपो वाले तो उसी दिन पुरानी जगह पर काबिज हो गए।

एक दिन के अभियान में फुंक जाते हैं एख लाक
कहीं भी एक दिन का अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाने पर एडीएम, सिटी मजिस्ट्रेट, एसपी ट्रैफिक, नगर आयुक्त, थाना प्रभारी समेत एक या दो जेसीबी, दो ट्रैक्टर ट्राली, टाटा मैजिक समेत कई वाहनों के साथ लगभग 16 नगर निगम कर्मचारी शामिल होते हैं। रोजाना सौ लीटर से ज्यादा डीजल खर्च होता है। अफसरों और पुलिस कर्मियों समेत समस्त कर्मचारियों के एक दिन का वेतन, डीजल आदि पर औसतन एक लाख रुपये रोज का खर्च आता है। फिर भी अतिक्रमण हटाने की खानापूरी की जाती है। होली दिवाली के अलावा किसी वीआईपी या वीवीआईपी के आने पर साल भर में आठ-10 बार अतिक्रमण हटाने की खानापूरी की जाती है। कहीं पुलिस न मिलने तो कहीं कोई और बहाने बनाकर अभियान बीच में ही ठप कर दिया जाता है।
विज्ञापन


इन रास्तों पर पैदल गुजरना तक मुश्किल
अयूब खां चौराहे से कुतुबखाना, कुतुबखाना से कोहाड़ापीर वाया प्रेमनगर चौराहा तक, आलमगिरीगंज से सिकलापुर, चौपुला से जिला पंचायत रोड, चौकी चौराहा से पटेल चौक, पीलीभीत बाईपास पर सेटेलाइट से फन सिटी तक, सेटेलाइट से शहामतगंज, शहामतगंज से कालीबाड़ी, डीडीपुरम और राजेंद्र नगर मार्केट, केके अस्पताल रोड, शाहदाना से डेलापीर मंडी, मिनी बाईपास, किला पुल से चौपुला पुल तक अवैध सब्जी और फल मंडी का अतिक्रमण। तो फिर किन स्थानों के अस्थायी अतिक्रमण चिहिेनत हुए और कहां से हटाए गए?

हम अतिक्रमण हटाने की योजना बनाते हैं। उसी हिसाब से जेसीबी, ट्रैक्टर ट्राली समेत सामान इकट्ठा किया जाता है। दर्जनों कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। मगर पुलिस का सहयोग न मिलने से न सिर्फ अभियान फ्लाप हो जाता है बल्कि हम भी हतोत्साहित होते हैं। -राम सिंह जाटव, अतिक्रमण विरोधी अभियान प्रभारी
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें