जो सड़क सवा साल पहले बन जाती, वह नगर निगम के जेई की कारस्तानी के चलते अब तक नहीं बन पायी। मात्र 135 मीटर लंबी सड़क का बढ़ी लागत से इस्टीमेट स्वीकृत कराने के चलते जेई ने चार बार लागत बदलकर इस्टीमेट बनाया। एक बार तो यह दो गुने तक पहुंच गया। अफसरों ने कई बार फाइल वापस की। आखिर में पिछले माह सड़क निर्माण की स्वीकृत मिलने के बाद टेंडर हो पाए। मेयर ने नगर आयुक्त से मामले की जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2012-13 को हरूनगला में फरीदपुर विधायक डा. सियाराम सागर के मकान से डा. एसी त्रिपाठी के मकान तक 135 मीटर लंबी प्री मिक्स सड़क स्वीकृत की थी। जेई कपिल मोहन ने 17 फरवरी 2014 को सड़क निर्माण के लिए 9.97 लाख का इस्टीमेट बनाया। 25 फरवरी 14 को सड़क के टेंडर मांगे गए। इस्टीमेट रेट पर ही टेंडर हो गए। तत्कालीन नगर आयुक्त ने टेंडर मंजूर नहीं किए। फिर चार जुलाई 2014 को जेई ने इसी सड़क के प्री मिक्स निर्माण का एस्टीमेट 18.66 लाख का बना दिया। 21 नवंबर 14 को इस्टीमेट की फाइल नगर आयुक्त के समक्ष रखी गई तो उन्होंने एस्टीमेट का पुन: परीक्षण कराने को लिखकर फाइल वापस कर दी। जेई ने 30 जनवरी 2015 को फिर सड़क का इस्टीमेट 12.56 लाख का बनाया। फाइल स्वीकृत होने के बाद टेंडर मांगे गए। 10 मार्च को टेंडर 18.11 प्रतिशत कम आए। मात्र 135 मीटर लंबी सड़क ठेकेदार ने नगर निगम से 10.28 लाख रुपये में बनाने का एग्रीमेंट कर लिया है। जेई की होशियारी के चलते सवा साल बाद लाखों की बढ़ी लागत पर ये सड़क बनने की उम्मीद बन पाई है।
‘सड़क का बार-बार इस्टीमेट बदलना गंभीर मामला है। नगर आयुक्त को मामले की जांच के लिए लिखा गया है। अगर जेई दोषी मिलता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।’ डा. आईएस तोमर, मेयर