धर्म दत्त सिटी हॉस्पिटल पहुंची निगम टीम व अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह।
बरेली। धर्मदत्त सिटी अस्पताल प्रबंधन ने रविवार को नगर निगम की टीम को कैद कर लिया। टीम अस्पताल प्रबंधन के सील तोड़ लेने की सूचना मिलने पर पहुंची थी। टीम को कैद करने की खबर मिली तो नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया। टीम को मुक्त कराने के लिए नगर निगम का प्रवर्तन दल मौके पर पहुंचा, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने उसे अंदर नहीं घुसने दिया। बाद में अपर नगर आयुक्त मौके पर पहुंचे और पुलिस बुलाकर अस्पताल गेट का ताला खुलवाकर टीम को मुक्त कराया।
नगर निगम ने शुक्रवार को धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल में सीलिंग की कार्रवाई की थी। इस दौरान मेयर ने इमरजेंसी और जनरल वार्ड को खुलवाकर अस्पताल प्रबंधन को कुछ दिन का समय दे दिया था। रविवार को नगर निगम प्रशासन को जानकारी मिली कि अस्पताल प्रबंधन ने सारी सील तोड़ दी हैं और पूरे भवन का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इस पर अतिक्रमण निरोधी दस्ते के प्रभारी जयपाल पटेल दो कर्मियों को साथ लेकर मौके पर पहुंचे। ये लोग सील तोड़े जाने की बाबत जानकारी ले ही रहे थे की तभी अस्पताल प्रबंधन से जुड़े लोग वहां आ गए और तीनों को कैद कर गेट पर ताला डाल दिया।
धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल की जमीन पर स्वामित्व को लेकर नगर निगम और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद चल रहा है। नगर निगम जमीन पर अपना दावा जताते हुए कई बार सीलिंग की कार्रवाई कर चुका है। शुक्रवार को भी नगर निगम ने पूरा अस्पताल सील कर दिया, लेकिन मेयर ने कुछ दिन का समय देकर इमरजेंसी और जनरल वार्ड खुलवा दिया था। अस्पताल प्रबंधन के कैद कर लेने पर जयपाल पटेल ने फोन से नगर निगम के अधिकारियों को सूचना दी। इस पर प्रवर्तन दल को मौके पर भेजा गया, लेकिन डॉक्टरों ने प्रवर्तन दल को अंदर नहीं घुसने दिया। इसके बाद अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह मौके पर पहुंचे तो उनकी अस्पताल के वकील से नोकझोंक हो गई। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। अपर नगर आयुक्त ने पुलिस की मदद से ताला खुलवाकर निगम कर्मियों को बाहर निकलवाया।
हॉस्पिटल के लोगों ने शुक्रवार को लगाई गईं सभी सील तोड़ दी थीं। सूचना मिलने पर नगर निगम के कर्मचारी जांच करने पहुंचे तो उन्हें कैद कर लिया। इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई की जा रही है। - अजीत कुमार सिंह, अपर नगर आयुक्त
दो लोग अस्पताल में आकर वार्ड में ताकझांक कर रहे थे। महिलाएं, बच्चे भी अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में उन लोगों से जब ताकझांक करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। काफी देर बाद बताया कि नगर निगम से आए हैं। पहचान पत्र मांगे तो वह भी नहीं दिखाए। इस पर उन्हें बिठा लिया गया। कैद करने की बात गलत है। - डॉ. अनुपम शर्मा, निदेशक धर्मदत्त सिटी हॉस्पिटल