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सिस्टम बेहाल- अफसरों को स्मार्ट सिटी वाले ओपन जिम की चिंता, रबड़ी टोला वाले पुलिया तक को परेशान

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बरेली। स्मार्ट सिटी के चक्कर में आम लोगों की छोटी-छोटी जरूरतों को नगर निगम ने ताक पर रख दिया है। करोड़ों रुपये की लागत से स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के पार्कों में ओपन जिम बनाए जा रहे हैं, लेकिन महज 18 हजार रुपये की लागत से बनने वाली पुलिया का एस्टीमेट बनाने के लिए निगम अफसरों के पास फुर्सत नहीं है। प्रभारी मंत्री के निरीक्षण पर भागदौड़ कर गलियां चमकाने वाले निगम अफसर कई पत्र लिखने के बावजूद यह पुलिया बनवाने को गंभीर नहीं हैं, जबकि रबड़ी टोला के लोग आए दिन इसमें गिरकर चोटिल हो रहे हैं।
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पुराना शहर के वार्ड 80 रबड़ी टोला के लोगों का कहना है कि सैलानी रोड पर रबड़ी टोला की पहली सड़क पर करीब दो साल पहले नाली पर पुलिया बनाई गई थी। पुलिया की गुणवत्ता ठीक नहीं थी, लिहाजा अब से करीब छह महीने पहले यह पुलिया टूट गई। अब इस पुलिया से सरिया बाहर झांक रही हैं और लोग आए दिन गिरकर घायल हो रहे हैं। सप्ताह भर पहले ही एक भिखारी महिला के इसमें गिरकर दांत टूट गए, लेकिन नगर निगम के अफसरों को इसकी कोई परवाह नहीं है। रविवार को अमर उजाला की टीम जब यहां पहुंची तो लोग यहां से बचकर निकलते दिखाई दिए। कुछ ऐसा ही हाल सूफी टोला का था। लोगों ने बताया सड़क नीची है और नालियों की सफाई नहीं होती, जिसकी वजह से करीब दो साल से मजार के पास गली में पानी भरा रहता है। बरसात में तो यहां लोगों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है।

स्मार्ट सिटी बना रहे अफसर मेयर की भी नहीं सुनते
पार्षद जुबैदा बी के भाई नौशाद अली ने बताया कि छोटे-छोटे कामों में नगर निगम के अफसर रुचि नहीं लेते। करीब 50 हजार की आबादी है, लेकिन सफाई कर्मचारी महज 20 हैं। इस वजह से पूरे वार्ड में गंदगी रहती है। पिछले सात-आठ साल से यहां कोई नई सड़क नहीं बनी। पुरानी सड़कें अब जर्जर हो गई हैं और नीची होने के कारण उन पर पानी भरने लगा है। सैलानी रोड की पुलिया बनवाने के लिए हमने कई बार निर्माण विभाग में कहा, मेयर ने भी पत्र लिखा लेकिन नगर निगम के अफसर उनकी भी सुनते।
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न पत्र का असर हुआ और न धरने का
वार्ड की समस्याएं नगर निगम बोर्ड में उठाई गईं। सैलानी वाली पुलिया बनाने के लिए तीन-चार पत्र लिखे। अन्य जर्जर सड़कों का निर्माण कराने को भी कहा लेकिन अफसरों पर कोई फर्क नहीं पड़ता। पिछले दिनों तो नगर निगम में धरना भी दिया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।
- जुबैदा बी, पार्षद

पार्कों के सौंदर्यीकरण पर आठ करोड़ से ज्यादा खर्च
महज 18 हजार रुपये की पुलिया बनाने का काम लटकाने वाला नगर निगम पार्कों के सौंदर्यीकरण और ओपन जिम पर आठ करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च कर रहा है। अमृत मिशन योजना के तहत 3.88 करोड़ रुपये से गांधी उद्यान, अक्षर विहार और सीआई पार्क का सौंदर्यीकरण चल रहा है। इसी योजना के ही तहत 2.56 करोड़ रुपये से कटघर पार्क, लोहिया पार्क और रामलीला मैदान का सौंदर्यीकरण का काम हो रहा है। इसके अलावा स्मार्ट सिटी के तहत करीब दो करोड़ रुपये की लागत से 24 पार्क में ओपन जिम बनाया जा रहे हैं।

पार्षदों की बात
99 हजार रुपये तक के काम के लिए बोर्ड की मंजूरी की जरूरत नहीं है। नगर निगम अफसर छोटे-छोटे काम फंसाकर शहर को खराब किया जा रहा है। भाजपा सरकार की छवि खराब की जा रही है।
- छंगामल मौर्य, पार्षद, कटरा चांद खां
गलियों में गड्ढे हैं, जिन्हें पैचवर्क करके दुरुस्त किया जा सकता है लेकिन नगर निगम अफसर छोटे-छोटे कामों पर ध्यान नहीं देते। मेयर के लिखे पत्रों को भी नगर निगम में घुमाया जा रहा है, जिससे विकास बाधित है।
- अवनेश कुमार, पार्षद, संजयनगर
छोटे-छोटे कामों के लिए नगर निगम में कई पत्र देने पड़ते हैं और अफसरों के यहां चक्कर लगाने होते हैं। न भाजपा पार्षदों की सुनवाई होती है, न विपक्ष वालों की। पूरे शहर की सफाई व्यवस्था भी बिल्कुल चौपट हो गई है।
- अकील गुड्डू, पार्षद, फरीदापुर चौधरी
सिकलापुर में मुख्य मार्ग पर सड़क उखड़ गई है और बजरी से लोग फिसलकर गिर रहे हैं। पैचवर्क करके सड़क को दुरुस्त कराया जा सकता है लेकिन धरने की चेतावनी के बाद भी इसे ठीक नहीं किया गया है।
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- विनोद सैनी, पार्षद, सिकलापुर
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