बरेली। कमाई के चक्कर में परंपरा का हवाला देकर नगर निगम ने सारे नियम ताक पर रख दिए हैं। निगम के बाहर पार्किंग स्थल में तिब्बती मार्केट लगवाने की शिकायत होने पर नगर निगम ने बृहस्पतिवार को यहां से पार्किंग और नो वेंडिंग जोन के बोर्ड ही उखड़वा दिए हैं। इस मामले को लेकर जागर संस्था के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार ने अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह से शिकायत के साथ ही प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भी ट्वीट किया है।
बता दें कि प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा की सख्ती के बाद नगर निगम के बाहर वाले क्षेत्र को पार्किंग और नो वेडिंग जोन घोषित किया था। अब 3.60 लाख रुपये किराया लेकर यह जगह तिब्बती मार्केट लगाने के लिए दे दी गई है। मामला सुर्खियों में आया तो निगम अफसरों ने अपनी छिपाने के लिए बृहस्पतिवार सुबह यहां लगे नो वेडिंग जोन और पार्किंग के बोर्ड हटवा दिए। यह जानकारी मिलने पर नगर निगम पहुंचे जागर संस्था के सचिव डॉ. प्रदीप कुमार ने अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह को ज्ञापन सौंपा और उस शासनादेश की कॉपी भी मांगी, जिसके तहत दुकानें लगवाई गईं। अपर नगर आयुक्त उन्हें वह कॉपी उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद में प्रदीप कुमार ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, निदेशक स्थानीय निकाय, प्रभारी मंत्री को ट्वीट पर इस मामले की शिकायत की है।
इन बिंदुओं पर उठाए सवाल
- तिब्बत बाजार का ठेका पथ विक्रेता अधिनियम 2014 और पथ विक्रेता नियमावली 2017 का उल्लंघन है।
- नियमावली का पालन न कर मनमाने ढंग से ठेका दिया गया।
- वेंडिंग जोन कमेटी ने निर्धारित किए हैं तो नगर निगम अकेले उसे कैसे समाप्त कर सकता है।
- इस अधिनियम में पहले से लगती आ रही बाजार को छूट देने का कोई प्रावधान नहीं है।
- इस बाजार के विक्रेता टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा भी चयनित नहीं हैं।
- कोई शासनादेश संसद के बनाए कानून के ऊपर नहीं हो सकता।
- शहर में पार्किंग की कमी के चलते इस पार्किंग स्थल को खत्म करना जनहित विरोधी है।
- नगर निगम संपत्ति का न्यासी है लेकिन उसे निजी लाभ के लिए किसी सार्वजनिक संपत्ति को किराए पर देने का अधिकार नहीं है।
तिब्बत मार्केट को स्थायी व्यवस्था नहीं है। जनता की सहूलियत को देखते हुए पूर्व में जिस जगह दुकानें लग रही थीं, वहीं दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है। - ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त
जिस परंपरा के नाम पर जगह देने की बात कही जा रही है, एक्ट में उसका कोई प्रावधान नहीं है। यह नियमविरुद्ध है। निगम अफसर नहीं मानेंगे तो हम कोर्ट जाएंगे। - डॉ. प्रदीप कुमार, सचिव, जागर संस्था