बरेली। भाजपा के बड़े नेताओं की शह के बावजूद नगर निगम की बेशकीमती जमीन पर कब्जा करने की कोशिश आखिरकार नाकाम हो गई। सोमवार को राजस्व विभाग की टीम से पैमाइश कराने के बाद नगर निगम की टीम ने अपनी करीब ढाई सौ गज जमीन पर कब्जा कर बनाई गई दीवार और गेट तुड़वा दिया और जमीन पर कब्जा लेने के बाद वहां अपना बोर्ड भी लगा दिया। इस बीच यह राज भी खुला कि साढ़े तीन करोड़ की नगर निगम की जमीन पर कब्जा कराने के लिए 50 लाख रुपये में डील हुई थी। बड़े भाजपा नेताओं का दबाव पड़ने की वजह से नगर निगम के जिम्मेदार भी इस मामले में बैकफुट पर थे, लेकिन शासन में मामला पहुंचने के बाद कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू हो गई। जमीन पर कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान भी हालांकि अपनी ‘पहुंच’ का इस्तेमाल कर नगर निगम पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला।
महानगर कॉलोनी के सामने राजस्व गांव शेरपुर में नगर निगम की ढाई सौ गज जमीन पर कब्जा कर लिया गया था। यह जमीन गाटा नंबर 25 पर थी। दरअसल शेरपुर में करीब चार हजार वर्ग जमीन पर व्यापारी बताए जाने वाले रोहित वर्मा, मनीष वर्मा और विजय वर्मा ने कुछ समय पहले निर्माण शुरू कराया था। इसी दौरान नगर निगम की जमीन भी कब्जा ली गई थी। इस जमीन का मौजूदा रेट करीब डेढ़ लाख रुपये मीटर बताया जाता है। निगम की जमीन पर कब्जा शुरू होने के बाद नगर आयुक्त के निर्देश पर शुक्रवार को मानचित्रकार हरीश भारती की ओर से रोहित, मनीष और विजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई थी, लेकिन तीनों की पैरवी कर रहे भाजपा नेता का दबाव पड़ा तो पुलिस ने भी आंखें फेर ली। शनिवार को फिर अवैध निर्माण शुरू कर दिया गया। रविवार को दीवारें खड़ी करके यहां गेट भी लगा दिया गया।
नगर निगम की जमीन पर कब्जे को निगम के जिम्मेदारों में ही दो अलग-अलग फाड़ हो गए। इस बीच नगर आयुक्त की ओर से इस मामले की रिपोर्ट शासन के साथ कमिश्नर को भी भेज दी गई। इसके साथ यह मामला संघ के वरिष्ठ नेताओं तक भी पहुंच गया। इसके बाद अपने पीए के मार्फत 50 लाख रुपये का सौदा कर कब्जा कराने की कोशिश कर रहे नेता को बैकफुट आना पड़ा। इधर, ऊपर से दबाव पड़ने के बाद प्रशासन भी हरकत में आया। सोमवार सुबह 11 बजे नगर निगम की टीम के साथ राजस्व विभाग की भी टीम मौके पर पहुंची। मौके पर पैमाइश की गई तो ढाई सौ गज जमीन नगर निगम की निकली जिसे दीवार के अंदर घेरकर गेट लगवा लिया गया था। पैमाइश के बाद निगम टीम ने दीवारें और गेट तोड़ दिया और जमीन पर कब्जा लेकर उस पर अपना बोर्ड भी लगा दिया। बोर्ड पर नगर निगम की जमीन का उल्लेख करते हुए उस पर कब्जा करने या उसकी खरीद-फरोख्त करने की कोशिश पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
नगर निगम की कार्रवाई के दौरान जमीन पर कब्जा करने के आरोपी मनीष और उनके पक्ष के लोगों ने निगम अधिकारियों का विरोध भी किया लेकिन उनकी एक न चली। नगर निगम के राजस्व प्रभारी ललतेश सक्सेना ने बताया कि पैमाइश कराने के बाद नगर निगम की जितनी जमीन निकली, उस पर कब्जा ले लिया गया है।
मामला गंभीर होता नजर आया तो पुलिस-प्रशासन ने दिया साथ
यह मामला हाल ही में संघ के नेताओं तक पहुंच गया था। भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार सख्त होने का संदेश देने में जुटे संघ में इसे काफी गंभीरता से भी लिया गया। कुछ नेताओं के मुताबिक इस मामले में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता की भूमिका सामने आने के बाद संघ की कुछ ही समय बाद दक्षिण में होने जा रही बैठक में भी रखने का निर्णय ले लिया गया। इस बीच शासन की ओर से भी इस मामले में कार्रवाई के निर्देश मिले तो भाजपा नेता के दबाव में इस मामले में कार्रवाई करने से कतरा रहे प्रशासन और पुलिस के अफसर भी हरकत में आ गए। इसके बाद सोमवार को भाजपा नेता के दखल को नजरअंदाज कर पूरी सख्ती के साथ निगम की जमीन से कब्जा हटा दिया गया।
महानगर के सामने अवैध कब्जा हटाने के लिए नगर निगम प्रशासन अगर मदद मांगेगा तो उसे मजिस्ट्रेट और फोर्स उपलब्ध कराई जाएगी। फिलहाल अभी नगर निगम की तरफ से इस संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है। - वीरेंद्र कुमार सिंह, डीएम
महानगर के सामने करीब 250 वर्गगज जमीन पर अवैध कब्जा था। कब्जे के आरोपियों पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा चुकी है। सोमवार को नगर निगम और राजस्व विभाग की टीम पहुंची। पैमाइश कराने के बाद अवैध कब्जा तुड़वाकर नगर निगम ने फैंसिंग कराने का काम शुरू करा दिया है। - सैमुअल पॉल एन, नगर आयुक्त