बरेली। कुष्ठ आश्रम प्रकरण में नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के खिलाफ शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की, मगर पार्षद बयान देने नहीं पहुंचे। इस पर एडीएम सिटी ने एकतरफा जांच पूरी करके नगर आयुक्त को क्लीनचिट दे दी। इसके बाद पार्षद बयान दर्ज पहुंचे मगर एडीएम नहीं मिले और उनके स्टाफ ने बयान लेने से मना कर दिया तो उन्होंने अपने लिखित बयान डाक से भेजे हैं। उनका कहना है कि संपत्ति के सारे अधिकार निगम बोर्ड को हैं तो इसकी अनुमति क्यों नहीं ली गई।
पिछले दिनों नगर आयुक्त के निर्देश पर निगम टीम ने पुलिस की मौजूदगी में कुष्ठ आश्रम के बराबर में खेत पर कब्जा लिया था। इसको लेकर काफी विवाद हुआ और गुस्साए कुष्ठ रोगियों ने नगर निगम में हंगामा भी किया। इस मामले में मेयर उमेश गौतम और कुछ पार्षदों ने राज्यपाल को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया था कि निगम के अधिकारी-कर्मचारी निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना कुष्ठ आश्रम की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। राज्यपाल तक मामला पहुंचा तो अपर मुख्य सचिव हेमंत राव ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से जांच कराकर रिपोर्ट देने को कहा। डीएम के निर्देश पर एडीएम सिटी महेंद्र कुमार ने इस मामले में शिकायतकर्ता पार्षद सलीम पटवारी और अवनेश कुमार को बयान के लिए बुलाया। मगर वे लोग नहीं पहुंचे। वहीं, नगर आयुक्त ने इसे निगम की जमीन पर अतिक्रमण बताया। इस पर एडीएम ने नगर आयुक्त को क्लीनचिट देकर डीएम को जांच रिपोर्ट सौंप दी। यह जानकारी होने पर सोमवार को पार्षद सलीम पटवारी और अवनेश कुमार बयान के लिए एडीएम कार्यालय पहुंचे। सलीम पटवारी ने बताया कि एडीएम कार्यालय में नहीं थे और स्टाफ ने बयान दर्ज करने से मना किया। इस पर उन्होंने अपने लिखित बयान एडीएम को डाक से भेज दिए हैं। बयान में उन्होंने कहा है कि नगर आयुक्त को निगम की जमीन बेचने या हस्तांतरित करने का अधिकार है। मगर इसके लिए बोर्ड की स्वीकृत जरूरी है, फिर इस मामले में अनुमति क्यों नहीं ली गई।
कुष्ठ आश्रम प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट भी भेज दी गई है। पार्षदों को बुलाया गया था लेकिन वे नहीं पहुंचे। अब इसका कोई औचित्य नहीं है।
- महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी