मुल्क से मुहब्बत व वफादारी हमारी जिम्मेदारी
मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने कहा कि मुल्क से मुहब्बत व वफादारी हमारी मजहबी और संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस समय वैसे भी मजहब, शरीयत, इस्लामी पोस्ट और ईमानी बातों के नाम पर बहुत सारे पाकिस्तानी मौलवी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से गुमराह कर रहे हैं। पाकिस्तानी मौलवी हमारे मुस्लिम नौजवानों को ऐसी रस्मों और आदतों का आदी बना रहे हैं कि जो आला हज़रत, हुज्जातुल इस्लाम, मुफ्ती ए आज़मे हिंद,जीलानी मियां, रेहाने मिल्लत, ताजुश्शरिया और हमारे दीगर बुजुर्गों के फतवे के खिलाफ हैं। इसलिए नौजवानों से अपील है कि इस तरह के पाकिस्तानी मौलवियों की पोस्ट, वीडियो, ऑडियो और लेखों इस्लामी सामग्री से धोखा ना खाएं। पाकिस्तानी मौलवियों की पोस्ट को ना खुद पढ़ें और ना ही दूसरे लोगों को शेयर करें। क्योंकि यह मज़हब व मसलक के भी खिलाफ है। देश व संविधान के भी विरुद्ध है।
मुफ्ती जमील खान ने कहा कि बहुत सारे नौजवान कम पढ़े लिखे या अनपढ़ होने की वजह से यह समझ ही नहीं पाते कि जो पोस्ट उन तक आई है। वह मसलक के खिलाफ है या देश व संविधान के विरुद्ध है। बस वह उसका इस्लामी नाम या मजहबी थंबनेल देख कर धोखा खा जाते हैं। अंजाने में शेयर कर देते हैं। मौलाना अख्तर ने कहा कि इस वक्त सोशल मीडिया का इस्तेमाल नासमझ नौजवानों के लिए ऐसा ही है, जैसे किसी छोटे बच्चे के हाथ में पिस्तौल या खतरनाक हथियार दे देना।