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UP News: 'पाकिस्तान से संबंधित कोई भी पोस्ट शेयर ना करें मुस्लिम नौजवान...', दरगाह आला हजरत से पैगाम जारी

Fri, 16 May 2025 04:45 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

दरगाह आला हजरत से जारी पैगाम में कहा गया है कि दुश्मन देश की हिमायत, तारीफ करना, उसकी बातों और उसके पैगाम का आदान-प्रदान करना, यह सब जुर्म के दायरे में आता है। इसलिए मुस्लिम नौजवान पाकिस्तान से संबंधित कोई भी सामग्री या पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा न करें। 
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दरगाह आला हजरत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली में दरगाह आला हजरत स्थित जामिया रजविया मंजरी इस्लाम के उलमा और मुफ्ती-ए-इकराम की शुक्रवार को बैठक हुई। इसमें दरगाह आला हजरत के प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान (सुब्हानी मियां) और सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां की ओर से मुस्लिम नौजवानों को पैगाम जारी किया गया है। जिसमें कहा गया है कि मुस्लिम नौजवान पाकिस्तान से संबंधित कोई भी सामग्री और पोस्ट को सोशल मीडिया पर शेयर ना करें। 

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दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने दरगाह प्रमुख और सज्जादानशीन के पैगाम के हवाले से बताया कि पिछले कुछ समय से भारत-पाकिस्तान के बीच जंग के हालात हैं। जंग के माहौल में बहुत कुछ बदल जाता है। इन हालात में सामने वाला मुल्क दुश्मन देश की श्रेणी में आता है। ऐसे में दुश्मन देश की हिमायत करना, उसकी तारीफ करना, उसकी बातों और उसके पैगाम का आदान-प्रदान करना, यह सब जुर्म के दायरे में आता है। 

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जिससे संबंधित कानून की बहुत सी संगीन धाराएं हैं, जिनके तहत आरोपी के खिलाफ मुकदमे दर्ज होते हैं। इसलिए मुस्लिम नौजवानों से अपील है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल इस समय बहुत खतरनाक है। इस वक्त सोशल मीडिया पर कुछ भी शेयर करने से परहेज करें या फिर कोई चीज शेयर भी करें तो खूब अच्छी तरह देख लें कि उसमें कोई गैरकानूनी बात तो नहीं। 

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मुल्क से मुहब्बत व वफादारी हमारी जिम्मेदारी 
मुफ्ती मोहम्मद सलीम बरेलवी ने कहा कि मुल्क से मुहब्बत व वफादारी हमारी मजहबी और संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस समय वैसे भी मजहब, शरीयत, इस्लामी पोस्ट और ईमानी बातों के नाम पर बहुत सारे पाकिस्तानी मौलवी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से गुमराह कर रहे हैं। पाकिस्तानी मौलवी हमारे मुस्लिम नौजवानों को ऐसी रस्मों और आदतों का आदी बना रहे हैं कि जो आला हज़रत, हुज्जातुल इस्लाम, मुफ्ती ए आज़मे हिंद,जीलानी मियां, रेहाने मिल्लत, ताजुश्शरिया और हमारे दीगर बुजुर्गों के फतवे के खिलाफ हैं। इसलिए नौजवानों से अपील है कि इस तरह के पाकिस्तानी मौलवियों की पोस्ट, वीडियो, ऑडियो और लेखों इस्लामी सामग्री से धोखा ना खाएं। पाकिस्तानी मौलवियों की पोस्ट को ना खुद पढ़ें और ना ही दूसरे लोगों को शेयर करें। क्योंकि यह मज़हब व मसलक के भी खिलाफ है। देश व संविधान के भी विरुद्ध है।
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मुफ्ती जमील खान ने कहा कि बहुत सारे नौजवान कम पढ़े लिखे या अनपढ़ होने की वजह से यह समझ ही नहीं पाते कि जो पोस्ट उन तक आई है। वह मसलक के खिलाफ है या देश व संविधान के विरुद्ध है। बस वह उसका इस्लामी नाम या मजहबी थंबनेल देख कर धोखा खा जाते हैं। अंजाने में शेयर कर देते हैं। मौलाना अख्तर ने कहा कि इस वक्त सोशल मीडिया का इस्तेमाल नासमझ नौजवानों के लिए ऐसा ही है, जैसे किसी छोटे बच्चे के हाथ में पिस्तौल या खतरनाक हथियार दे देना। 
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