डॉ. उदय प्रताप सिंह
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समाजवादी पार्टी व मुलायम कुनबे में मची खींचतान पर सपा से पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वक्त के साथ सपा में भी बदलाव हुआ है। पहले समाजवाद पूरी जीवनशैली थी, लोग बहुत साधारण जीवन जीते थे। अब वक्त के साथ काफी कुछ बदला है तो समाजवाद इससे अछूता कैसे रह सकता है। पहले मुलायम सिंह साइकिल से चुनाव प्रचार कर लेते थे पर अब नई पीढ़ी हेलिकॉप्टर से परहेज करेगी तो काम कैसे चलेगा। कहा कि दूसरे दलों की तरह समाजवाद और सपा भी बदली है।
जनेश्वर मिश्र को किया याद
उन्होंने कहा कि जनेश्वर मिश्र के साथ सफेद कपड़े पहनते थे और बेहद सादगी से रहते थे। उनकी और मेरी पत्नियों का देहांत हो चुका था। एक दिन मैं चटख कुर्ता पहनकर कवि सम्मेलन से आया तो मिश्र ने कटाक्ष किया कि शायद पत्नी अपने कपड़े आपको दे गईं। वह चाहते थे कि मैं भी साधारण ही रहा करूं। कहा कि गांधी जी से समाजवाद काफी प्रेरित रहा और यह विचारधारा व जीवनशैली बन गया। खानपान, आचार व्यवहार सब साधारण था। हालांकि वक्त के साथ बदलाव जरूरी है।
आज के कवि पहले अपने पारितोषिक की बात पूछते हैं...
आचमन संस्था से सम्मानित होने बदायूं पहुंचे कवि और साहित्यकार डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पहले जब हम लोगों को कवि सम्मेलन का निमंत्रण मिलता था तो पूछते थे कि मंच पर और कौन व किस स्तर के कवि रहेंगे। अब कवि केवल अपने पारितोषिक की बात पूछते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि नए कवियों में कई बहुत ऊर्जावान हैं। हम सोचते थे कि नई पीढ़ी कैसे नई चुनौतियों के लिए तैयार होगी पर कई नए कवि शानदार काम कर रहे हैं। उनका कहना था कि कवि, पत्रकार व लेखक को खुद्दार होना ही चाहिए। कई बड़े लोग हमसे प्रभावित होकर हमें किसी न किसी तरह उपकृत कर सकते हैं पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता की हमसे क्या अपेक्षा है। उन्होंने अपना एक शेर कहकर बात खत्म की।
जो सिर से लेकर पांव तक खुद्दार नहीं है, हाथों में कलम लेने का हकदार नहीं है।
बेहद करम है आपका पर दिल को क्या कहें, इंसा को खुदा कहने को तैयार नहीं है