बीमार पड़ी तो यही बेटा पानी पूछेगा... अगर इसको जेल भेज दिया तो कौन ख्याल रखेगा मेरा...। कोई है भी तो नहीं मेरा। यह शब्द एक बेबस मां के हैं। जो सुभाषनगर थाने में अपने बेटे को छुड़ाने के लिए पुलिस वालों के सामने गिड़गिड़ा रही थी। मां के शब्दों को सुनकर पुलिस वालों के दिल भी पसीज गये। लेकिन शांतिभंग में चालान हो चुका था। लिहाजा उस बेबस मां से दरोगा ने कहा कि अम्मा जमानत के रुपयों का बंदोबस्त कर लो। इसके बाद थाने से मां कचहरी की तरफ चल दी। काफी देर तक कचहरी में भटकने के बाद भी कोई आसरा नहीं मिला तो सुभाषनगर थाने पहुंची। इस वक्त तक उसके बेटे को कोर्ट में मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा चुका था। मजिस्ट्रेट ने पूरा मामला समझने के बाद उसको चौदह दिन की न्यायिक हिरासत पर भेज दिया।
कभी कचहरी पर होटल की मालकिन अनीता अरोरा के पति की नौ साल पहले मौत हो चुकी है। उन्होंने बताया कि ससुराल वालों ने होटल बेचा, लेकिन हिस्सा नहीं दिया। अब पति की बीमारी से मौत के बाद सिर्फ उनका बेटा योगेंद्र ही सहारा है। उन्होंने बताया कि मेरे एक ही लड़का है कमाने वाला, इसके सिवा मेरा कोई नहीं है। जब पूछा गया कि बेटे की मारपीट की शिकायत क्यों नहीं की। उन्होंने जवाब दिया कि वह शराब पीकर थोड़ा बहुत मारपीट करता है, लेकिन क्या कर सकती हूं। मुझे तो उसे माफ ही करना है। उसको सबक मिल गया है।
पुलिस वालों ने भी की बेटे को छुड़ाने की कोशिश
कलयुगी बेटे की हरकत सुभाषनगर की गुरुद्वारा के पास लगे सीसी कैमरा में कैद होने के बाद पुलिस ने योगेंद्र को पकड़ लिया था। मां का दर्द देखकर पुलिस वालों ने भी बाद में प्रयास किया कि कम से कम जुर्माना में उनका बेटा छूट जाए, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
बेघर होने के बाद गुरुद्वारा में लिया था आसरा
सुभाषनगर में पहले मां-बेटा नरक की टाल पर रहते थे। वहां भी मारपीट के चलते मकान मालिक ने घर खाली करा लिया। फिर दोनों ने बबन खां का पुरवा मोहल्ला में किराये पर मकान लिया, लेकिन योगेंद्र की नशे की लत और मां से मारपीट की वजह से यह घर भी चार दिन पहले खाली करा लिया गया था। इसके बाद मां ने गुरु द्वारा में आसरा लिया था।
नशा करते पकड़े जाने पर भगाया था योगेंद्र को
नरक की टाल पर आबकारी विभाग में काम करने वाले नरेंद्र कपूर ने चार दिन पहले योगेंद्र को घर के पास नशा करते हुए पकड़ा था। उसको डांटकर भगाया था। थाने में योगेद्र से जब मां से मारपीट के विषय में बात की गई तो वह रोते हुए बोला कि मुझसे गलती हो गई। मकान था नहीं, मैं मां को ढूंढ रहा था। जब गुरुद्वारा के पास मिली तो हाथ उठा दिया।