शाही। शाही कस्बे में पाइपलाइन और टैंक निर्माण में 10 करोड़ से अधिक की राशि खर्च होने के ढाई दशक बाद भी लीकेज और अन्य खामियों को दूर नहीं किया जा सका है। इससे कस्बे की 20 हजार की आबादी के सामने जल का संकट बरकरार है।इससे निपटने के लिए ढाई दशक पहले बने टैंक और पाइपलाइन को ठीक न कराकर नए सिरे से टैंक लगाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
ढाई दशक पूर्व शाही-मिर्जापुर रोड पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने नगर पंचायत की भूमि पर 20 हजार की आबादी के लिए 10 करोड़ से अधिक खर्च करके टैंक और पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था। इससे कस्बे के 12 वार्डों के लोगों में उम्मीद जागी थी कि उनके सामने पेयजल का संकट दूर होगा। उस समय नगर पंचायत अध्यक्ष के लिए चुनाव के बाद जल निगम की ओर से बनाया गया टैंक हैंडओवर नहीं किया गया।
कारण बताया गया कि जगह-जगह डाली गई पाइपलाइन लीकेज हो गई थी। टैंक भी लीक कर रहा था। पहले लीकेज दुरुस्त करने की बात को कहकर टैंक हैंडओवर नहीं किया गया, लेकिन कार्यकाल के अंतिम समय में अधिशासी अधिकारी शमशाद अली की तैनाती के दौरान टैंक हैंडओवर कर लिया गया। तब टैंक से जल सप्लाई करते ही जगह-जगह डाली गई पाइपलाइन फट गई और पानी सड़क पर जाने लगा। उसके बाद से यह कार्य अटक गया। संवाद
पुराने टैंक से डेढ़ लाख लीटर पानी, अब जरूरत ज्यादा की
मन्नान खां, आसिफ सिद्दिकी, पूर्व मंडल अध्यक्ष शिवम शर्मा ने बताया कि कस्बे में पुराना टैंक है, जिसकी क्षमता डेढ़ लाख लीटर है। सप्लाई सुबह और शाम 15 से 30 मिनट मिलती है, लेकिन पानी जल्द खत्म हो जा रहा है, जबकि ढाई दशक पहले बनी टैंक से तीन लाख लीटर पानी मिलने का आसार था। इससे काफी हद तक लोगों की समस्याओं का हल हो जाता।
नगर पंचायत के अध्यक्ष वीरपाल मौर्य का कहना है कि कस्बा में नई जल पाइपलाइन बिछाने के लिए सर्वे हो चुका है। शीघ्र ही अलग-अलग मोहल्लों के लिए तीन नए टैंक भी निर्मित किए जाएंगे। अधिशासी अधिकारी पुष्पेंद्र राठौर ने बताया कि जल निगम के द्वारा बनाए गए टैंक को ठीक करने के लिए वह दो बार रिमाइंडर लेटर भेज चुके हैं। उम्मीद है शीघ्र टैंक को सही करवाकर कस्बा वासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।