बरेली। लंबी दूरी की आधे से ज्यादा ट्रेनों में पेंट्रीकार की सुविधा नहीं होने से यात्रियों को खाने-पीने के सामान के लिए वेंडर्स पर निर्भर रहना होता है। काफी संख्या में अवैध वेंडर इसका फायदा उठाते हैं। बरेली से चलने वाली लोकमान्य तिलक, बरेली-भुज एक्सप्रेस, बरेली-वाराणसी एक्सप्रेस में भी पेंट्रीकार की दरकार है।
बरेली होते हुए रोजाना औसतन 190 ट्रेनें गुजरती हैं। यहां से 32-35 हजार यात्रियों का आवागमन होता है, लेकिन लंबी दूरी की 100 से ज्यादा ट्रेनों में यात्रियों को 22-25 घंटे तक खाने-पीने के सामन के लिए वेंडर्स पर ही निर्भर रहना होता है। हाल में ही शुरू की गई लालकुआं-बंगलूरू एक्सप्रेस में भी रेलवे ने पेंट्रीकार की सुविधा नहीं दी है। रेलवे के अधिकारी खाने की ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा का हवाला देते हैं, पर हकीकत में यात्री अवैध वेंडरों के भरोसे ही रहते हैं।
घटिया सामान, ओवररेटिंग की शिकायतों की भरमार
अवैध वेंडर यात्रियों को खराब गुणवत्ता का खाने-पीने का सामान अधिक कीमतों पर बेचते हैं। अधिकृत वेंडर्स भी इसमें पीछे नहीं रहते। ऐसी शिकायतों की भरमार रहती है। ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही वेंडर कोचों के पास आ जाते हैं। इनमें तमाम वेंडरों का रेलवे से कोई लेना-देना नहीं होता। मुरादाबाद-बरेली-लखनऊ रेलखंड में उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे की टीमों के साथ ही आरपीएफ ने दो महीने में 80 अवैध वेंडर्स पर कार्रवाई की है। पिछले दिनों बरेली जंक्शन पर भी आठ अवैध वेंडरों को पकड़ा गया था।
पेंट्रीकार को लेकर रेलवे ने नियमों में बदलाव किया है। ज्यादातर ट्रेनों में बेस किचिन से भोजन और ब्रेकफास्ट की आपूर्ति की जाती है। कई ट्रेनों में निजी कंपनियों को यह जिम्मा दिया गया है। यात्रियों को सही कीमत पर बेहतर गुणवत्ता का सामान मिले, इसको लेकर लगातार उपाय किए जा रहे हैं।- राजेंद्र सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, इज्जजनगर मंडल
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