बरेली। बरेली कॉलेज के संस्कृत विभाग के शोधकर्ताओं ने उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययन कर रहे युवाओं में बढ़ते आक्रामक व्यवहार पर सर्वे किया। जिसमें पाया कि युवाओं में बढ़ते इस व्यवहार को कम करना है तो पर्यावरण विज्ञान, शारीरिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा का भी पाठ पढ़ाना होगा।
संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना गिरी ने बताया नैतिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करना चाहिए। इसके लिए हाल ही में विभाग द्वारा यूजीसी को इसे कोर्स में शामिल करने के लिए एक पत्र भी लिखा गया है।
संस्कृत विभाग की शोधार्थी संगीता राठौर ने 9 महाविद्यालयों के 800 छात्र-छात्राओं, 32 शोध विद्यार्थियों व 17 अध्यापकों पर अध्ययन किया है। जिसे पूरा करने में करीब दो साल का समय लगा। संगीता बताती हैं कि इस अध्ययन का आधार एक प्रश्न पत्र रहा, जो अद्वैत वेदांत पर आधारित है। जिसे संस्कृत का दर्शनशास्त्र माना गया है।
इसमें सभी तरह के ज्ञान का निचोड़ है, ये नैतिक मूल्यों के बारे में सोचने पर मजबूर करता है। हर प्रश्न हमारे सैद्धांतिक मूल्यों, सही गलत, धार्मिक मूल्यों आदि को चुनौती देते हैं।
हर महाविद्यालय में टेस्ट विद्यार्थियों का नैतिक परीक्षा इस प्रश्न पत्र के माध्यम से परखी गई। सर्वे में 85.9 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि उन्हें नैतिक शिक्षा की आवश्यकता है यौन अपराधों पर नियंत्रण, बढ़ते क्रोध पर नियंत्रण व संयम बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने बताया जिस तरह आज का युवा हर स्तर पर युवावस्था में गलत गतिविधियों का शिकार हो रहा है, इससे उसमें मूल्यों की कमी है, जिसे केवल नैतिक शिक्षा से ही बदला जा सकता है। संवाद