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बंदर पकड़ा या उल्लू बनाया

Fri, 24 Feb 2017 01:23 AM IST
बरेली।  
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भारत सरकार ने 14 मार्च 2016 को शिमला शहर में बंदरों को छह महीने के लिए वर्मिन घोषित करने की अधिसूचना जारी की थी। - फोटो : अमर उजाला
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शहर में बंदराें ने उत्पात मचाकर लोगाें को तंग कर रखा है। छतों पर दौड़ रहे बंदर किसी पर भी हमला कर देते हैं। नगर निगम ने इन्हें पकड़ने के लिए एनजीओ को टेंडर दिया तो इसका पैसा हड़पने की तैयारी शुरू हो गयी है। अभी तक एनजीओ ने पांच सौ बंदर पकड़ कर बाहर छोड़ने की रिपोर्ट निगम को दी है। जबकि ये बंदर कहां छोड़े गए हैं इसकी कोई जानकारी नहीं है। वहीं इलाकों के पार्षदों का कहना है कि उनके यहां से कोई बंदर न तो पकड़े गए हैं और न ही कोई पकड़ने आया है। 
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शहर में बंदरों की समस्या के बाद टेंडर निकाले गए थे। इसमें सिर्फ एक एनजीओ जीवन संरक्षण विकास समिति ने दिलचस्पी दिखाई और इन्हें ही काम सौंपा गया। ढाई लाख रुपए के टेंडर का काम 20 जनवरी से शुरू हुआ था। कुल एक हजार बंदराें को पकड़ने का लक्ष्य दो चरणों में निर्धारित किया गया है। इन बंदराें को पकड़कर जंगल में छोड़ना था।

पार्षदाें के यहां तो ऐसे ही हैं बंदर 
सिविल लाइंस आवास विकास वार्ड में पार्षद राजेश अग्रवाल ने बताया कि उनके इलाके में तो बंदर ही बंदर हैं। हेड पोस्ट ऑफिस के सामने कालोनी में बंदरों ने परेशान कर रखा है। वाणिज्य कर विभाग के पास तो बंदरों ने छतों पर आने वाले कुछ लोगों को दौड़ा लिया था। बेनीपुर चौधरी के पार्षद इश्तयाक, मौलानगर के पार्षद विकास शर्मा ने भी किसी प्रकार के कोई बंदर पकड़े न जाने की बात कही है। उनके यहां बंदर वैसे ही हैं। 
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एक बंदर पकड़ने के लिए 500 रुपए 
ढाई लाख रुपए के टेंडर में एक बंदर पकड़ने के लिए 500 रुपए दिए जा रहे हैं। अभी एनजीओ को भुगतान नहीं हुआ है, लेकिन उसने पहले चरण में पूरे पांच सौ बंदर पकड़ने की बात कही है। लेकिन यह बंदर कहां पकड़ कर छोड़े गए इसका कोई रिकार्ड नहीं है। 

बंदर की समस्या अभी भी है जबकि एनजीओ की ओर से 500 बंदर पकड़ने की बात सामने आई है। एनजीओ से पूछा गया है कि उन्होंने बंदर कहां पकड़कर छोड़े हैं इसकी पूरी जानकारी दें। तभी भुगतान होगा। 
ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त 

बंदराें को पीलीभीत की तरफ छोड़ा जा रहा है, अभी 500 बंदर पकड़े हैं। इनकी गिनती भी करते हैं और जहां से फोन आता है वहां बंदराें को पकड़ा जाता है। पार्षदों की जगह इलाकों में लोगों के हस्ताक्षर कराते हैं।
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राकेश, अध्यक्ष, जीवन संरक्षण विकास संस्था 
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