लैब में शिक्षक और छात्र-छात्राएं
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शिक्षकों का कहना है कि यदि सही दिशा और संसाधन मिलें, तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी देश का भविष्य संवारने वाली तकनीकों में अपनी अमिट छाप छोड़ सकते हैं। इस प्रयोगशाला के माध्यम से छात्र अब पाठ्यपुस्तकों से बाहर निकलकर ग्रहों, तारों, अंतरिक्ष मिशनों और खगोलीय घटनाओं का सीधा अनुभव प्राप्त कर रहे हैं।
प्रधानाचार्य वंदना मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार की व्यावहारिक और अनुसंधान-उन्मुख शिक्षा प्रणाली छात्रों में विश्लेषणात्मक कौशल को मजबूत करती है। जब बच्चे इतनी कम उम्र में व्यावहारिक विज्ञान से जुड़ते हैं, तो उनका आत्मविश्वास और समस्या-समाधान का दृष्टिकोण पूरी तरह बदल जाता है।
जल संरक्षण पर भी होगा काम
कैंट बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन ने बताया कि इस योजना उद्देश्य विद्यार्थियों के अंदर छीपी हुई प्रतिभा को एक अच्छा मंच देना है। तरह तरह की लैब के साथ स्कूल का विकास किया गया है। अब आगे विद्यालय में रेन वाटर हार्वेस्टिंग समेत अन्य निर्माण की योजना पर किया जा रहा है।