बरेली। मंडल के चारों जिलों के 1.8 लाख मजदूरों को दिसंबर 2024 से मजदूरी नहीं मिली। मनरेगा पोर्टल पर 85.36 करोड़ रुपये के भुगतान लंबित हैं। उनको होली के लिए जरूरी खरीदारी करनी है, पर जेब खाली होने से वे मजबूर हैं। इंतजार का एक-एक दिन भारी पड़ रहा है। भुगतान कब तक मिलेगा? यह भी स्पष्ट नहीं है।
मनरेगा में 237 रुपये प्रतिदिन की दर से मजदूरी मिलती है। मनरेगा अधिनियम में काम कराने के आठ दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। इसलिए अगर मनरेगाकर्मी आठ दिन के अंदर पोर्टल पर मस्टररोल की फीडिंग नहीं करते हैं तो उन पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। अगर शासन स्तर से देरी हो तो उस पर कार्रवाई का जिक्र अधिनियम में नहीं है। जानकार बताते हैं कि इसी वजह से समय पर भुगतान नहीं हो पा रहा है।
वर्जन
स्थानीय स्तर से भुगतान की प्रक्रिया समय से पूरी की गई है। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा में आवंटन होते ही भुगतान होगा। - जगप्रवेश, मुख्य विकास अधिकारी
किस जिले में कितना है बकाया
जिला बकाया प्रभावित मजदूर
बरेली 23,20,45,676 50 हजार
शाहजहांपुर 25,09,17,000 50 हजार
पीलीभीत 19,64,56,404 40 हजार
बदायूं 17,42,43,366 40 हजार
नोट : मजदूरों की संख्या अनुमानित है। बकाया धनराशि रुपये में।
कैसे मनाएं त्योहार
मजदूरी नहीं मिली। अब त्योहार कैसे मनाएं? अब अधिकारी बताएं कि मजदूरी कब तक मिल पाएगी। - रामखेलावन, गांव खल्लपुर, विकास खंड फरीदपुर
भुगतान नहीं मिलने से त्योहार पर संकट है। परिचितों से उधार लेकर किसी तरह से काम चलाएंगे। - ओमेंद्र सिंह, गांव गोपालपुर नगरिया अनूप, विकास खंड बिथरी चैनपुर
कर्मियों के मानदेय के 8.5 करोड़ रुपये भी अटके
मनरेगा में आवंटन नहीं होने से कर्मियों के मानदेय के 8.5 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। ऐसे में उनकी होली भी फीकी है। जिले में 776 रोजगार सेवक, 47 तकनीकी सहायक, 13 एपीओ, चार लेखा सहायक, आठ कंप्यूटर ऑपरेटर मिलाकर 875 मनरेगाकर्मी सेवारत हैं। अधिकतर रोजगार सेवकों को एक साल महीने से मानदेय नहीं मिला है। अकेले रोजगार सेवकों के मानदेय के 7.5 करोड़ रुपये अटके हैं। तकनीकी सहायकों के 56.40 लाख, एपीओ के 31.20 लाख, लेखा सहायकों के 7.20 लाख और कंप्यूटर ऑपरेटर के 14 लाख रुपये बकाया हैं। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ ने दो दिन पहले यह मुद्दा उठाया था। उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ के जिलाध्यक्ष गंगादीन कश्यप ने बताया कि मानदेय नहीं मिलने से त्योहार मनाना मुश्किल हो गया है। उधार लेकर काम चलाने की मजबूरी है। मैंने संगठन की ओर से ज्ञापन दिया तो मुख्य विकास अधिकारी ने मामला शासन को संदर्भित करने का भरोसा दिया है।
ब्यूरो