रामपुर विधान परिषद (स्थानीय प्राधिकारी) चुनाव में घनश्याम लोधी को आखिरी दिन सपा प्रत्याशी घोषित किए जाने पर उनका सिंबल लेटर (ए व बी) फार्म 15 फरवरी को सरकारी हेलीकाप्टर से आने के मामले में सपा नेता झूठ पर झूठ बोलते रहे। आयोग के प्रेक्षकों ने हकीकत सामने रख दी। प्रत्याशी और सपा संगठन की ओर से नागरिक उड्डयन मंत्रालय में हेलीकाप्टर के किराए के 2.10 लाख रुपये जमा कराने पड़े। आचार संहिता उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार इस मामले में आगे भी कार्रवाई बनती है। दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। विभागीय जांच भी बनती है लेकिन मामला सपा सरकार से जुड़ा होने के कारण अब सरकारी तंत्र पल्ला झाड़ रहा है।
15 फरवरी को सरकारी हेलीकाप्टर से मुख्यमंत्री के ओएसडी जगदेव सिंह सिंबल का ए और बी फार्म लेकर आए थे। दो दिन बाद आचार संहिता के उल्लंघन का मुद्दा उठा तो उस समय सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह का कहना था कि मुख्यमंत्री के ओएसडी तो व्यक्तिगत काम से आए थे। वो उनसे मिलने के लिए पुलिस लाइन गए थे, वहां पर उन्होंने सिंबल लेटर नहीं लिया, बल्कि उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया था। दूसरी ओर उसी समय सपा प्रत्याशी घनश्याम लोधी का कहना था कि उनको नहीं पता कि ए और बी फार्म कहां से आया लेकिन यह अथारिटी लेटर तो सपा जिलाध्यक्ष ने ही दिया था। उनको तो 15 फरवरी की सुबह अचानक बताया गया कि एमएलसी का प्रत्याशी बनाया गया है।
आचार संहिता उल्लंघन का मुद्दा गरमाया तो प्रेक्षक ने जांच में यह पुुष्टि कर दी थी कि सिंबल लेटर लाने में सरकारी हेलीकाप्टर का इस्तेमाल किया गया था। आयोग और डीएम को चिट्ठी भेजी गई, उसी के बाद यह रकम सपा की ओर से जमा कराई गई। इसके बाद सपा जिलाध्यक्ष ने अपना पूर्व का बयान बदलते हुए कहा कि हेलीकाप्टर किसी व्यक्तिगत काम से आया था। उसी से सिंबल लेटर लाया गया था। जिसका किराया 2.21 लाख रुपया सरकारी कोष में जमा करा दिया गया है।
‘पूरा ब्योरा आयोग के मुख्य निर्वाचन कार्यालय को संदर्भित कर दिया है। इस मामले में आयोग से जो भी निर्देश मिलेंगे, उनका पालन किया जाएगा।’ गौरव दयाल, डीएम
अकेले लड़ रहे हैं गोपाल गुप्ता
बरेली। एमएलसी चुनाव में आचार संहिता उल्लंघन की लड़ाई शिवसेना के नेता गोपाल गुप्ता अकेले ही लड़ रहे हैं। भाजपा इस मुद्दे पर शुरू से चुप्पी साधे हुए है। भाजपा को बार बार इस चुप्पी के बारे में पूछा गया तो जिलाध्यक्ष की ओर से भारत निर्वाचन आयोग के स्थान पर राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायती पत्र भेज कर खानापूरी कर दी गई। लग तो यही रहा है कि भाजपा नेतृत्व मुलायम सरकार को परेशान करने के मूड में नहीं है। गोपाल गुप्ता का कहना है कि का कहना है कि सरकारी हेलीकाप्टर से सिंबल लेटर मंगाने का किराया जमा कराने से इस मामले का निस्तारण नहीं होता।आयोग के स्तर से निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट भी जाएंगे।