इंडियन आयल कंपनी की मोबाइल लैब ने विशेष अभियान के दौरान अब तक 70 पंपों से डीजल और पेट्रोल के नमूने लेकर रिपोर्ट कंपनी को भेज दी है। इस कार्रवाई को लैब ने गोपनीय रखा है लेकिन यह संकेत मिले हैं कि आठ पंपों पर गंभीर शिकायतें मिलीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनके लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
देवचरा में नेफ्था से नकली पेट्रोल बनाने का खुलासा होने के बाद पेट्रोल पंपों की जांच के लिए डीएम ने तेल कंपनियां को लिखा था। डीएम के निर्देश पर आईओसी ने मोबाइल वैन भेज दी, जो कि आईओसी के साथ-साथ अन्य कंपनियों के तेल की जांच भी कर रहीं हैं। जिले की करीब 170 पंपों की जांच के लिए यह अभियान अभी दस और दिन तक चलेगा।
जिला पूर्ति अधिकारी केएल गुप्ता ने बताया कि मोबाइल लैब से हमने नमूनों की रिपोर्ट मांगी है। जिसके आधार पर जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग भी अपने स्तर से कार्रवाई क रेगा। फिलहाल तीनों तेल कंपनियों से कहा है कि वह अपने स्तर से पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करें।
एस्सार के खिलाफ प्रशासन उठाएगा सख्त कदम
देवचरा में तेल का खेल करने वाली एस्सार कंपनी ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है। ऐसे में इस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन प्रदेश सरकार को लिख रहा है। यह कंपनी प्राइवेट सेक्टर की है और इसके यहां गोलमाल का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। इसीलिए इस कंपनी के खिलाफ प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय को कड़ी कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। इस कंपनी ने अभी तक प्रशासन के किसी भी पत्र का संतोषजनक जवाब नहीं दिया है। जिला पूर्ति अधिकारी ने बताया कि इसके खिलाफ कार्रवाई के शासन में लिखने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।
नेफ्था इस्तेमाल करने वाली इकाइयों की होगी जांच
बरेली। देवचरा में नेफ्था से नकली पेट्रोल बनाने का खुलासा होने के बाद प्रदेश सरकार इसके दुरुपयोग रोकने के लिए कड़ा फैसला लेने जा रही है। इसीलिए इस नेफ्था को इस्तेमाल करने वाली औद्योगिक इकाइयों का ब्योरा निदेशक एवं आयुक्त उद्योग से मांगा गया है। उनकी सूूची के आधार पर सत्यापन यह सत्यापन होगा कि वह वास्तव में इस नेफ्था से उत्पादन कर रहीं हैं या फिर उसकी कालाबाजारी नकली सामान बनाने के लिए कर रहीं हैॅं। इस बारे में 20 मार्च तक इस तरह की औद्योगिक इकाइयों का पूरा ब्योरा तलब किया है।
सात पर्चों में अंकुर का नाम बढ़ा
तेल के ग्यारह खिलाड़ियों के खिलाफ 28 फरवरी को थाना भमौरा में मुकदमा लिखा गया। इस विवेचना का पहला पर्चा उप निरीक्षक देवेंद्र सिंह ने काटने के बाद सात आरोपियों को जेल भिजवा दिया। तीन दिन तक विवेचना में कुछ नहीं हुआ। चार मार्च को यह विवेचना इंस्पेक्टर आंवला एसएस पवार को दी गई। विवेचक ने बताया कि उन्होंने सात पर्चे काटे हैं। उन्होंने अपने पहले ही पर्चे में कोल्ड स्टोरेज के मालिक केके गुप्ता के बेटे अंकुर गुप्ता का नाम बढ़ा दिया। जेल गए आरोपियों के बयान पहले ही हो चुके थे। दो गवाहों के बयान उन्होंने लिखे हैं। आरोपियों के घर दबिश देने के बाद तीन पर्चे काटे गए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी स्टे की उन्हें जानकारी नहीं है।
आईजी बोले, गिरफ्तारी में पुलिस की लापरवाही रही
बरेली। आईजी विजय प्रकाश ने स्वीकार किया है कि थाने की पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई और वह गलत तर्क देकर हाईकोर्ट से स्टे ले आए। इस प्रकरण में पुलिस की लापरवाही रही है, लापरवाही कहां और किस स्तर पर हुई है, इस बारे में वह जांच कराएंगे। उन्होंने कहा कि आरोपियों से भमौरा पुलिस की मिलीभगत की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए इस मामले में एसओ समेत जिन पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध होगी उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस प्रकरण में अब तक हुई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।