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बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के सोना तौलने वाले कांटों में मिली गड़बड़ी

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यंत्र की जांच करते अधिकारी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बाट-माप विभाग ने की जांच, आईसीआईसीआई, एक्सिस और स्टेट बैंक के कांटे में पकड़ी गई घटतौली
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चालान करने के साथ कांटों को किया सीज, बाट भी नहीं मिले मानकों के अनुरूप

बरेली। बाट-माप विभाग की जांच में कई सरकारी और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ फाइनेंस कंपनियों में भी घटतौली का खुलासा हुआ। बैंकों और फाइनेंस कंपनियों के सोना तौलने वाले इलेक्ट्रानिक कांटों में 900 मिलीग्राम तक की हेराफेरी पकड़ी गई। बाटों भी मानक के अनुरूप नहीं मिले और न ही उनका सत्यापन कराया गया था। बाट माप विभाग ने इन बैंकों और कंपनियों के चालान काटने के साथ कांटे सीज कर दिए और बाटों को जब्त कर लिया।
बृहस्पतिवार सुबह सहायक बाट माप नियंत्रक मनोज कुमार टीम के साथ बैंकों में कांटे-बाट की जांच करने पहुंचे। जांच शुरू हुई तो कहीं कांटों में गड़बड़ी मिली तो कहीं बाटों का सत्यापन नहीं कराया गया था। कांटों का परीक्षण करने पर 100 से लेकर 900 मिलीग्राम तक का अंतर पाया गया। कुछ जगह स्टील के बाट प्रयोग होते मिले। टीम ने इन बाटों को जब्त कर लिया। कांटों को सीज कर बैंक अधिकारियों को चेतावनी दी कि सिस्टम सही कराके सत्यापन करा लें।
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बाट माप नियंत्रक के मुताबिक एसबीआई की ग्रीन पार्क शाखा के इलेक्ट्रॉनिक कांटे में 300 मिलीग्राम का अंतर मिला। पीलीभीत बाईपास पर आईसीआईसीआई बैंक में बाट सत्यापित नहीं मिले। सिविल लाइंस की एक्सिस बैंक शाखा के कांटे में भी 800 मिलीग्राम का अंतर मिला। यहां स्टील के बाट इस्तेमाल हो रहे थे। टीम ने कांटा सीज करने के साथ ही स्टील के बाट जब्त कर लिए। डीडीपुरम की एक्सिस बैंक शाखा में भी बाट सही नहीं मिले। सत्यापन प्रमाण पत्र भी नहीं था। सिविल लाइंस की आईआईएफएल फाइनेंस कंपनी के कांटे में भी 720 मिलीग्राम का अंतर पकड़ा गया। बाटों का सत्यापन भी नहीं मिला। यहां टीम ने कांटे-बाट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। यह फाइनेंस कंपनी सोने पर लोन देने का काम करती है। बता दें कि बैंकों के लॉकर में ज्वेलरी रखने से पहले उसका वजन कराया जाता है। गोल्ड लोन भी दिया जाता है।

तौल का सिस्टम दुरुस्त होना अनिवार्य

सहायक बाट माप नियंत्रक मनोज कुमार ने बताया कि गोल्ड लोन देने वाली फाइनेंस कंपनियों के साथ बैंकों में भी तौल यंत्र और बाट आदि दुरुस्त रखना अनिवार्य है लेकिन कुछ बैंक और फाइनेंस कंपनियां इस पर ध्यान नहीं दे रही हैं। तौल मशीनों की गड़बड़ी से ग्राहकों को आर्थिक नुकसान होता है।

सत्यापित बाटों का ही प्रयोग करने के निर्देश

चेकिंग के दौरान सहायक बाट माप नियंत्रक ने निर्देश दिए कि निर्धारित बाटों का तौल में प्रयोग में किया जाए। तौल मशीनों का रखरखाव भी ठीक रखा जाए। इन मशीनों से सोने जैसी महंगी धातु तोली जाती है लिहाजा तौल की शुद्धता शत-प्रतिशत होनी चाहिए। तौल में अंतर आने का मतलब ग्राहकों से धोखा है। टीम ने सरदाना स्थित बरेली स्वीट्स एंड बेकर्स और हजियापुर में आरएस मिल्स में भी चेकिंग की।

सोने के बदले लोन देने वाली फाइनेंस कंपनी के साथ कई सरकारी और निजी बैंकों में कांटे-बाट की चेकिंग कराई गई। कई कंपनियों और बैंकों में तौल यंत्र और बाटों का रखरखाव सही नहीं मिला। मशीनों की तोल में काफी अंतर मिला। सत्यापन प्रमाण पत्र भी नहीं थे इसलिए चालान किए गए हैं। अवैध बाट जब्त कर लिए हैं। सत्यापन कराए बगैर तौल मशीनें चालू न करने के निर्देश दिए गए हैं। - मनोज कुमार, सहायक नियंत्रक बाट माप विभाग

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