उद्योग विभाग ने जिले में 1989 में नई औद्योगिक नीति के तहत तहसील और ब्लाक स्तर पर नए भूखंड विकसित किए। इसका नाम मिनी औद्योगिक आस्थान दिया गया। पिछले 27 वर्षों में एक भी स्थान आबाद नहीं हो पाया। फरीदपुर और रामनगर में एक ही आवेदक ने सभी भूखंड ले लिए हैं, इन दोनों स्थानों पर दो इकाइयां चल रही हैं। इफको आंवला, मझगवां, भदपुरा, शेरगढ़ और बिथरी में तीन सौ से ज्यादा प्लाट वर्षों से निवेशकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। मीरगंज स्थित 55 प्लाटों में सिर्फ तीन लोग आधा अधूरा कारोबार शुरू कर पाए हैं।
राजकीय औद्योगिक आस्थान
सीबी गंज: करीब 1300 करोड़ रुपये वार्षिक टैक्स देने वाला इंडस्ट्रियल स्टेट कई जन सुविधाओं से जूझ रहा है। नगर निगम टैक्स तो वसूलता है, लेकिन पेयजल आपूर्ति, सफाई, स्ट्रीट लाइट, नाली निर्माण, अतिक्रमण और जलभराव की समस्या बरकरार है। जिले के सबसे पुराने इंडस्ट्रियल स्टेट में कई प्रमुख औद्योगिक इकाइयाें का काफी जलवा रहता था, अब उस स्थान पर अवैध कालोनी और अन्य निर्माण हो चुके हैं। इनका भू उपयोग तक नहीं बदला गया है। औद्योगिक विवादों के चलते आईटीआर, विमको, आरआर रोलर, आरएस स्टील आदि कई प्रमुख इकाइयां वर्षों पहले बंद हो गयीं। उद्योग विभाग ने सीबी गंज औद्योगिक क्षेत्र नगर निगम को नहीं सौंपा है। हालांकि राजकीय औद्योगिक आस्थान के विकास के लिए उद्यमी राजेश गुप्ता आदि समस्या उठाते रहते हैं। उद्योग बंधु बैठक में उठे मामले कागजों में ही सिमट जाते हैं।
भोजीपुरा: इंडस्ट्रियल स्टेट एरिया भी उद्योग विभाग द्वारा संचालित है। यह एरिया 55 वर्ष पहले विकसित हुआ था। पांच दशक बीतने पर भी आधे से ज्यादा इकाइयां कागजों पर दौड़ रहीं हैं। यहां किसान प्रोडक्ट जैसी कई प्रमुख इकाइयां कर्मचारी यूनियनों के धरने प्रदर्शन और विभागीय असहयोग के चलते बंद हो गयी। सवा चार सौ करोड़ वार्षिक रुपये टैक्स देने वाले उद्यमी मूलभूत सुविधाएं पाने के लिए संघर्षरत हैं। जिला पंचायत टैक्स जरूर वसूलता है, लेकिन जन सुविधाओं के नाम पर सब गोलमाल है। गड्ड्ेदार सड़कें, जलभराव, अवैध कब्जे, स्ट्रीट लाइट, नाली निर्माण, बिजली समस्या समेत कई मामले उद्योग बंधु बैठकों में उठते रहे हैं। इन सब मांगों पर ढाक के तीन पात जैसी कहावत लागू है।
सीबी गंज: वर्ष 1960
एरिया 16.09 एकड़
भूखंड 56
शेड 17
(दस प्रतिशत इकाइयां कागजों पर)
भोजीपुरा: वर्ष 1962
एरिया 38.34 एकड़
भूखंड 71
शेड 18
(आधे से ज्यादा इकाइयां कागजों पर)
इनका कहना है::
‘भोजीपुरा हो या अन्य इंडस्ट्रियल एरिया, सरकारी तंत्र समस्याएं हल करने में रुचि नहीं लेता है। यही वजह है कि 1960 में बरेली जिले में औद्योगिक विकास की दौड़ शुरू हुई, 57 वर्षों में प्रदेश में सबसे पीछे दिख रहा है। बड़े और नामी गिरामी इकाइयाें में तालाबंदी हो चुकी है। जबकि उद्योग धंधे चहुमुखी विकास की रीड़ मानी जाती है। अगर इसे गंभीरता से नहीं तो स्थिति और खराब होगी।’
- अजय शुक्ला, अध्यक्ष, भोजीपुरा इंडस्ट्रियल एरिया
‘जिले में सीबी गंज एक मात्र ऐसा इंडस्ट्रियल स्टेट है जहां पर 90 प्रतिशत से अधिक इकाइयां कार्य कर रही हैं। उद्यमी नगर निगम और विभिन्न टैक्स नियमित दे रहे हैं, फिर भी आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई बार उद्योग बंधु बैठक में मामले उठाए गए हैं। सिर्फ बिजली सप्लाई व्यवस्था ही सुधर पायी है। जीटीआई प्रबंधन ने दीवार बना दी, इससे पानी बहाव बंद हो गया है। प्रशासन से समस्याएं हल करने का आग्रह किया है।’
- राजेश गुप्ता, उद्यमी