सेना में फर्जी प्रमाण पत्रों पर भर्ती की फिर आहट मिली है। सेना के लिए चयनित हो चुके 10 युवाओं के सर्टिफिकेट संदिग्ध पाए गए हैं। इनका ऑनलाइन सत्यापन नहीं हो सका। इसके चलते सेना भर्ती कार्यालय ने इनको ट्रेनिंग पर भेजने से रोक दिया है। अब इनके सर्टिफिकेट का सत्यापन यूपी बोर्ड कार्यालय और तहसीलों से कराया जाएगा।
इन युवाओं की भर्ती पिछले साल बरेली में हुई थी। दौड़ और अन्य शारीरिक परीक्षण तथा लिखित परीक्षा के बाद इस भर्ती में 320 युवक जीडी सैनिक भर्ती के लिए चयनित किए गए थे, तब से लगातार इनका शैक्षिक प्रमाणपत्र और मूलनिवास की जांच कराई जा रही थी। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन यूपी बोर्ड की वेबसाइट से आनलाइन किया गया लेकिन 10 युवाओं के प्रमाणपत्रों का रिकार्ड नहीं मिल सका। वहीं, राजस्व विभाग की वेबसाइट पर भी इनके मूल निवास का सत्यापन नहीं हो पाया है। इन युवाओं ने खुद को पीलीभीत, शाहजहांपुर और बरेली जिले का निवासी तो दर्शाया है लेकिन इन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा गाजीपुर, बलिया आदि जनपदों के विद्यालयों से उत्तीर्ण की है। ऐसे में, सेना इनकी पात्रता को और संदिग्ध मान रही है। सेना कार्यालय ने फिलहाल इन युवाओं के नाम का खुलासा नहीं किया है, क्योंकि सत्यापन में यह सांठगांठ कर सकते हैं। हालांकि सेना सत्यापन पर पूरी तरह से नजर रखेगी। भर्ती कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि सेना के जवान खुद जाकर अपने सामने सत्यापन कराएंगे।
इंसेट...
गुर्जर गैंग का हो सकता है हाथ
सेना भी मान रही है कि अगर इन 10 युवकों के सर्टिफिकेट फर्जी मिलते हैं तो इनकी भर्ती कराने में भी आदेश गुर्जर की भूमिका हो सकती है। फिलहाल इनके सर्टिफिकेट का सत्यापन होना बाकी है।
वर्जन...
अब इनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन यूपी बोर्ड मुख्यालय से कराया जाएगा। इसके लिए इनके सर्टिफिकेट की कापी वहां भेजी जाएगी, वहीं इनके मूल निवास प्रमाणपत्र का सत्यापन उन्हें जारी करने वाली तहसीलों से कराएंगे। अगर सत्यापन में इनके सर्टिफिकेट फर्जी साबित होते हैं तो इनके खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।
-कर्नल राजीव दीक्षित, भर्ती के निदेशक