1993 और 2010 की तरह इस बार भी बरेली में बाढ़ आने का अंदेशा बना हुआ है। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने कागजों में तो बाढ़ नियंत्रण के इंतजाम कर लिए हैं लेकिन वास्तव में ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। लंबे चौड़े दावे वाले इन आंकड़ों की पोल तो नदियों में बाढ़ जैसी स्थिति होने पर स्वत: ही खुल जाएगी।
बरेली से 100 किलोमीटर दूर कुमायूं मंडल की पहाड़ियां हैं और वहां इन दिनों जबरदस्त बारिश हो रही है। जुलाई और सितंबर में बारिश का यही हाल रहा तो 1993 और 2010 की तरह किच्छा नदी (पश्चिमी बहुगल) धौरा, पूर्वी बहगुल, पनघैली तथा देवहा नदी में इस बार भी भीषण बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। जिला प्रशासन ने बाढ़ नियंत्रण के लिए पुलिस, पीएसी, सेना, सिंचाई, विद्युत, राजस्व तथा अन्य विभागों के साथ सामंजस्य स्थापित करके तैयारियों का खाका तैयार किया है। बचाव के लिए 12 मोटर बोट पीएसी के पास होने का दावा किया गया है। तहसीलों में 100 से अधिक नाव की व्यवस्था तथा पांच से लेकर दस गांवों के बीच एक सुरक्षित राहत केंद्र ( बाढ़ चौकी) की स्थापना की गई है। हालांकि मौके पर कुछ है नहीं।
100 साल के आंकड़े बताते हैं कि किच्छा नदी का जल स्तर खतरे के निशान को पार करने के कारण 1993 और 2010 में नदी के दांयी ओर 30 और बाईं ओर 22 गांव बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसी तरह धौरा नदी के आसपास के 58 गांव, देवरनियां नदी के 58, पश्चिमी बहगुल नदी के 46, देवरनियां नदी के आठ, शंखा नदी के 29, पनघेली नदी के आठ तथा पूर्वी बहुगुल नदी के 110 गांव बाढ़ से प्रभावित होते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राम गंगा नदी में बाढ़ की स्थिति कालागढ़ डेम में अधिक जल छोड़े जाने के कारण होती रही है। इस नदी के क्षेत्र में आने वाले 73 गांवों पर बुरी तरह असर पड़ता रहा है।
इन वर्षो में आई बाढ़
1993- किच्छा नदी में आई बाढ़ ने 100 साल पुराना रिकार्ड ध्वस्त किया। दो दर्जन से अधिक गांव बुरी तरह प्रभावित हुए थे।
1995 एवं 1998 में रामगंगा नदी में बाढ़ आने से मीरापुर, भोलापुर, ऊंचा गांव और बहजुईया गांव बुरी तरह प्रभावित हुए।
2004 में किच्छा नदी में बाढ़ के कारण 20 गांवों के लोगों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा
2007 एवं 2008 में राम गंगा, किच्छा, दोजोरा, देवरनिया, धौरा, देवहा, पनघैली एवं अप्सरा नदियों में बाढ़ के कारण चार दर्जन से अधिक गांव प्रभावित हुए।
2010 में बाढ़ की भयंकर स्थिति रही, इस दौरान 100 गांव बाढ़ की चपेट में आए। बडे़ स्तर पर राहत कार्य किया गया था।
2011 में सभी नदियों में जल स्तर खतरे के निशान को पार कर गया था लेकिन गांवों में ज्यादा असर नहीं पड़ा। लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर बाढ़ चौकी बनाकर शिफ्ट करा दिया गया था।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष बना
सिंचाई विभाग ने जिला मुख्यालय पर सहायक अभियंता रामबाबू वर्मा को बाढ़ नियंत्रण केंद्र का प्रभारी बनाया है। जिसके लिए 0581-2511664 तथा मोबाइल नंबर 9458238103 जारी किए गए हैं, इन नंबरों पर पीड़ित व्यक्ति समस्याएं बता सकते हैं।
बाढ़ चौकियों का दावा
जिला प्रशासन ने बाढ़ चौकियों पर लोकल सैंड, ईसी बैग, नायलोन क्रेट, बांस, टार्च, छाता, मोमबत्ती, दियसलाई आदि की व्यवस्था की गई है।
बयान
‘अभी बाढ़ की स्थिति नहीं है लेकिन प्रशासनिक तैयारियां पूरी हैं। उत्तराखंड की नदियों और काला डैम में बढ़ते जल स्तर पर हमारी पूरी नजर है। सिंचाई विभाग की टीम वहां के जल स्तर के आधार पर बाढ़ राहत के इंतजाम कराएगी’ मनोज कुमार, एडीएम फाइनेंस