मीरगंज। सर्दियों में रामगंगा नदी के किनारे अपनी मौजूदगी से क्षेत्र को खास बनाने वाला दुर्लभ प्रवासी पक्षी सुर्खाब अब वापस लौटने लगे हैं। मौसम में बदलाव और ठंड कम होने के कारण सुर्खाब ने अपने मूल ठिकानों की ओर उड़ान भरनी शुरू कर दी है। नदी तट और आसपास के खेतों में जहां कुछ दिन पहले तक इसकी चहलकदमी दिखती थी, वहां अब सन्नाटा पसरा नजर आ रहा है।
हर साल सर्द मौसम में सुर्खाब दूर-दराज के ठंडे इलाकों से मीरगंज की रामगंगा तक पहुंचता है। शांत वातावरण, खुले खेत और पर्याप्त भोजन इसकी पसंद होते हैं। सुबह के समय झाड़ियों के बीच इसकी गतिविधियां और शाम को नदी किनारे विश्राम करते दृश्य लोगों को आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन जैसे ही तापमान में बढ़ोतरी हुई, प्रकृति के नियम के अनुसार सुर्खाब ने वापसी का सफर शुरू कर दिया। पक्षी प्रेमियों का कहना है कि सुर्खाब का आना जहां खुशी और उत्सुकता पैदा करता है। वहीं उसका जाना मन को भावुक कर देता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, सुर्खाब का सुरक्षित आना और लौटना क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन का संकेत है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि इस दुर्लभ पक्षी को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाएं और इसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखें, ताकि आने वाली सर्दियों में रामगंगा के तट पर सुर्खाब की वापसी फिर से देखने को मिल सके।
सुर्खाब साइबेरिया सहित कई अन्य देशों से यहां ठंड के दिनों में आती हैं। गर्मी होने पर फिर अपने देशों में चली जाती है। यह गर्मी से बचने के नदियों और पोखरों में रहती हैं।
- संतोष कुमार मठपाल, वन क्षेत्राधिकारी, मीरगंज