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Bareilly News: एनओसी में अटकी मेट्रो... अस्पतालों को चिकित्सक, निवेशकों को भूमि का इंतजार

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बरेली। प्रदेश सरकार बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 बजट पेश करेगी। बरेली के लोग इस पर टकटकी लगाए हुए हैं। पिछले साल बजट में की गई घोषणाओं में कुछ पर तो काम हुआ, लेकिन मेट्रो, चिकित्सकों की तैनाती जैसे कई ख्वाब धरातल पर उतर नहीं सके। निवेशकों को भी भूमि मिलने का इंतजार है। इस बार शहरवासियों को उम्मीद है बड़ी विकास परियोजनाएं घोषणाओं से बाहर निकलकर मूर्त रूप लेंगी।
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वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में शहर में मेट्रो ट्रेन का सपना पूरा नहीं हो पाया। बरेली विकास प्राधिकरण ने इस पर काम तो किया, लेकिन एयरफोर्स से अनुमति न मिलने के कारण सपना अधूरा रह गया। अब शहरवासियों को इस बार के बजट से उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ग्रीन रोड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट (सीएम ग्रिड) योजना के अंतर्गत काम कराने के लिए करीब 81 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना के तहत स्टेडियम रोड, राजेंद्रनगर, डीडीपुरम व प्रेमनगर में काम चल रहे हैं। काम धीमा होने से शहरवासियों को परेशानी हो रही है।
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पिछले बजट में झुमका तिराहा और बदायूं रोड पर नए बस अड्डों और पुराने बस अड्डे पर चार्जिंग स्टेशन के निर्माण को मंजूरी मिली थी, लेकिन तीनों परियोजनाओं पर काम शुरू नहीं हो सका है। सेटेलाइट बस अड्डे को अंतरराज्जरीय बस टर्मिनल में रूप में विकसित करने का मामला भी अटका हुआ है। बस अड्डों के लिए भूमि चिह्नित तो की गई है, पर अब तक हस्तांतरित नहीं हो सकी है। चार्जिंग स्टेशन के लिए 1.50 करोड़ की डीपीआर भेजी गई है, लेकिन अब तक बजट नहीं मिल सका है।
बीते वर्ष के बजट में बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ऋण मुक्त ब्याज की घोषणा हुई थी। नतीजा, सीएम युवा उद्यमी और सीएम युवा स्वरोजगार योजना के तहत करीब दो हजार युवा स्वरोजगार से जुड़े। विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना से 12 सौ और ओडीओपी के तहत दो सौ लोगाें को वित्तीय सहायता मिली। उद्यमियों की भूमि की आस पूरी नहीं हो सकी। भोजीपुरा औद्योगिक क्षेत्र के खाली प्लॉटों के आवंटन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद तकनीकी खामी से स्थगित कर दी गई।
पिछले बजट में अस्पतालों और सीएचसी को सीसी कैमरों से लैस करने की घोषणा हुई थी। इसके तहत महिला अस्पताल, जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी पर कैमरों से निगरानी से शुरू हो गई है। आयुष्मान योजना के बकाया बजट का भुगतान भी कर दिया गया है। हालांकि, डॉक्टरों की तैनाती की घोषणा पूरी नहीं हुई। संविदा पर सिर्फ 30 भर्तियां हुई हैं।
मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत वित्त वर्ष 2019-20 से अब तक 2,829 परिवारों को आवास बनाने के लिए आर्थिक मदद दी गई है। अगले वित्त वर्ष के लिए 750 लाभार्थियों का चयन कर शासन को मांग भेजने की तैयारी है।

परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2024-25 से जिले के 13 ब्लॉकों में जैविक खेती कराई जा रही है। वर्तमान में मीरंगज व फतेहगंज को छोड़कर अन्य 13 ब्लॉकों में 511 किसान 20 क्लस्टर में जुड़कर जैविक खेती कर रहे हैं। प्रत्येक क्लस्टर 50 हेक्टेयर का है। इसमें प्रत्येक किसान को अधिकतम एक एकड़ में ही जैविक खेती कराई जा रही है। इस बार इसको विस्तार मिलने की उम्मीद है।
जिले के तीन आईटीआई संस्थानों में टाटा के सहयोग से आधुनिक कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कक्ष का निर्माण होना था। यूपी प्रोजेक्ट्स कॉरपोरेशन की ओर से बहेड़ी और सिंधौली स्थित संस्थानों में इसका निर्माण शुरू किया गया है। आंवला में अभी निर्माण शुरू नहीं हो सका है।
बीते वर्ष बजट में प्रदेश सरकार ने छात्राओं को उच्च शिक्षा की तरफ आकर्षित करने व ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की घोषणा की थी, लेकिन यह मूर्त रूप नहीं ले सकी।
समग्र शिक्षा के तहत चरणबद्ध तरीके से प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब की स्थापना की जानी थी। पहले चरण में जिले को दिए गए लक्ष्य को पूरा कर लिया गया है। अब तक 58 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इसकी स्थापना कर दी गई है।
पीडब्ल्यूडी ने सालभर में 33 करोड़ रुपये खर्च कर जिले की 125 से अधिक सड़कों की मरम्मत कराई। 42 करोड़ की 55 परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने का इंतजार है। 25 करोड़ की लागत से पांच पुलों के काम प्रस्तावित हैं।

फ्री होल्ड भूमि के बिना उद्योगों का विस्तार कठिन है। निजी औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं और विकास शुल्क से राहत मिलनी चाहिए। गिफ्ट डीड की व्यवस्था सराहनीय है। - सलिल बंसल, उद्यमी
उद्योगों के विकास के लिए प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं। नीतिगत समस्या का समाधान शासन स्तर से होगा। इस बजट में उद्यमियों को कुछ रियायतें मिलने की उम्मीद है। - उन्मुक्त संभव शील, उद्यमी
बरेली कॉलेज इस क्षेत्र की हेरिटेज में शामिल है, लेकिन महाविद्यालय के पास इतना पैसा नहीं है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा सके। कॉलेज के रख-रखाव के लिए भी बजट मिलना चाहिए। - प्रो. ओपी राय, प्राचार्य, बरेली कॉलेज

उच्च शिक्षा में शोध कार्यों को बढ़ावा देने की जरूरत है। छात्र-छात्राओं का रुझान बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा को रोचक बनाने के लिए प्रयास होने चाहिए। - डॉ. स्वाति, असिस्टेंट प्रोफेसर, कन्या महाविद्यालय भूड़
जिला स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं, संसाधन और मार्गदर्शन मिले तो उनकी प्रतिभा निखर सकती है। प्रतियोगिताओं के लिए खेल समूहों को पर्याप्त धनराशि मिलनी चाहिए। - मुकेश कुमार, जिला व्यायाम शिक्षक
खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि वह आगे बढ़ सकें। इसके लिए जिले से ही खिलाड़ियों पर निवेश होना चाहिए, क्योंकि यहीं से उनकी खेल यात्रा की शुरुआत होती है। - मो. जैस, एथलेटिक्स खिलाड़ी
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