पुरुषों का बढ़ता उत्पीड़न और त्रिकोणीय प्रेम प्रसंग बन रहे वजह
बरेली कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग की अध्यक्ष प्रो. नवनीत कौर आहूजा ने बताया कि बीते दो-तीन वर्षों में पति पर पत्नी के हिंसक होने के मामले बढ़े हैं। ज्यादातर मामलों में प्रेम-प्रसंग उजागर हुए। उत्तर प्रदेश समेत देशभर में ऐसी घटनाएं सामने आने से पुरुष वर्ग आशंकित है। इससे पत्नी पर भरोसा डगमगाया है। एक बार पत्नी के नाम से संपत्ति खरीदने पर भविष्य में खरीद-बिक्री का निर्णय पुरुष नहीं ले सकता। पुरुष छूट से ज्यादा अपनी गाढ़ी कमाई को लेकर संवेदनशील हैं।
सोशल मीडिया भी जिम्मेदार
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष कुमार के मुताबिक, सोशल मीडिया भी वैवाहिक जीवन में जहर घोल रहा है। टेलीमानस पर लगातार इससे संबंधित कॉल आती रहती हैं। इसमें घर से निकलने के बाद पत्नी के सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और पूछने पर संतोषजनक जवाब न देने, महिलाओं द्वारा ज्यादा वक्त फोन पर बिताने और ससुराल पक्ष के साथ कम रहने, छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने या ताना मारने की शिकायतें बढ़ी हैं। इससे रिश्तों की डोर कमजोर हो रही है। जबकि पुरुषों पर महिलाओं द्वारा शक के मामले कम हुए हैं।
महिलाओं के नाम रजिस्ट्री के आंकड़े
वित्त वर्ष रजिस्ट्री
2022-23 31,114
2023-24 25,087
2024-25 21,176
2025-26 19,139 (अक्तूबर तक)
(नोट : आंकड़े निबंधन कार्यालय से प्राप्त)
एआईजी स्टांप तेज सिंह यादव ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार महिलाओं के नाम से रजिस्ट्री पर स्टांप में एक फीसदी छूट दी जा रही है। रजिस्ट्री किसके नाम से होगी, यह खरीदार पर निर्भर होता है। उन पर कोई दबाव नहीं होता। लोग संपत्तियों की रजिस्ट्री महिला के नाम से कराकर छूट का लाभ ले सकते हैं।