बरेली। प्रसिद्ध फिल्म संगीतकार रविंद्र जैन नहीं रहें, मगर बरेली से जुड़ी उनकी यादें हमेशा ताजा रहेंगी। वह जब भी यहां आए जिससे भी मिले उसे अपना बना गए। खानकाह नियाजिया तो लगभग वह हर बार गए।
रविंद्र जैन सबसे पहले बरेली मेें 1976 में स्टार में आए थे। यह कार्यक्रम पायनियर इंटरनेशनल क्लब की ओर से विशप मंडल इंटर कालेज मैदान पर आयोजित किया गया था। इसमें उनके साथ हेमलाता भी बरेली आईं थीं। इसके बाद 2009 बसंतोस्तव व 2010 में दोनो बार वह टीबरी नाथ मंदिर में नरायणी धर्मार्थ ट्रस्ट के वार्षिकोत्सव में आए। इसमें उन्होंने रानी सती दादी के भजनों का गायन किया। इस कार्यक्रम को संयोजक राकेश बूबना ने बताया कि वह कार्यक्रम में आने से पहले खानकाह नियाजिया गए थे। जहां से कार्यक्रम स्थल आने तक कार चालक से बरेली के बारे में जानकारियां हासिल की। जब वह मंच पर आए तो उन्होंने बरेली की पूरी जानकारी पर आधारित भजन सुना डाला जिसमें उन्होंने खानकाह नियाजिया की तारीफ भी की थी।
आखरी बार वह नवंबर 2014 में आए। उन्हें प्रशासन की ओर से पीलीभीत में आयोजित ग्रामोद्योग महोत्सव के कार्यक्रम में भाग लेना था। तब वह यहीं के एक होटल में ठहरने के दौरान यहा के तमाम लोगों से मिले थे। अगले दिन वह पीलीभीत चले। इस महोत्सव में जहीर अहमद जहीर का भी आर्केष्ट्रा कार्यक्रम था।
रविंद्र जैन का बरेली के कुछ लोगों ने आत्मीय रिश्ता रहा। इसमें खानकाह नियाजिया के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी और यहां के एक कपड़ा व्यापारी नदीम शमसी से तो उनके घरेलू ताल्लुकात थे। वह जब भी बरेली आते इनके यहां जरूर जाते। इसमें प्रसिद्ध गजल गायक खुर्शीद अली खां को 1983 मेें मुंबई के फिल्म संगीत सम्मेलन में बुला कर गवाया था। यह कार्यक्रम रंगभवन में सुर श्रंगार संसद की ओर आयोजित किया गया था। खुशीद अली की और भी आगे एक कार्यक्रम के लिए बात चली थी।
इसके अलावा संगीत निर्देशक गोरा घोष से भी उनके अच्छे रिश्ते थे। वह बरेली आने पर एक बार उनके घर भी गए थे। गोरा घोष के पुत्र भाष्कर घोष को वह बहुत पसंद करते थे। उन्होंने बरेली सहित आस पास के कोई भी कार्यक्रम में वह आए तो भाष्कर को जरूर गायकी के लिए जरूर बुलाया। वह मुरादाबाद रहा हो या लखनऊ। लखनऊ में तो वहां के होटल रेजीडेंसी में रविंद्र जैन नाईट में बुलवा कर गवाया। इसी तरह जहीर एंड पार्टी के गायक राजीव बेताब को हाल ही में अपनी अगली फिल्म में गाने के लिए फाइनल कर दिया था।