फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इतने गरीब हैं यूपी बोर्ड के स्कूल!

Sat, 10 Oct 2015 01:21 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
बरेली। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) और स्कूल स्पोर्ट्स प्रमोशन फाउंडेशन की ओर से आयोजित होने वाली नेशनल टैलेंट सर्च एंड नर्चर प्रतियोगिताआें में यूपी बोर्ड के स्कूलों की भागीदारी शून्य है। इसकी वजह है प्रतियोगिता में पंजीकरण के लिए पांच हजार रुपये शुल्क लगना। यूपी बोर्ड के एक भी स्कूल ने पंजीकरण शुल्क देना उचित नहीं समझा जब कि सीबीएसई के विद्यालयों ने पंजीकरण शुल्क देकर अपनी टीम की इंट्री कराली। बरेली में होने वाली क्रिकेट प्रतियोगिता में सिर्फ सीबीएसई के 16 स्कूल भागीदारी कर रहे हैं। फाउंडेशन के जिला समन्वयक ने साई के अंतर्गत बनाए गए स्कूल क्रिकेट काउंसिल के चेयरपर्सन को पत्र भेजकर यह जानकारी दी है।
विज्ञापन

स्कूलों से अच्छे खिलाड़ी ढूंढने और खेलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से यह प्रतियोगिता आयोजित कराई जा रही है। इसमें आठ खेल शामिल हैं। जिसमें स्कूल से भाग लेने वाली टीम का मैच होगा। अच्छा खेलने वाले खिलाड़ियों का चयन कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर खिलाया जाएगा। अगर खिलाड़ी चमके तो उन्हें सरकार अपने खर्च पर भारतीय टीम के लिए तैयार करेगी। इतने लुभावने अवसर का फायदा भी यूपी बोर्ड नहीं उठाना चाहता। शहर के अधिकतर सीबीएसई स्कूलों ने आनलाइन रजिस्ट्रेशन कर पांच हजार रुपये जमा कर दिए हैं। दूसरी तरफ अधिकतर यूपी बोर्ड के स्कूलों ने पांच हजार रुपये जमा करने की बात पर पल्ला झाड़ लिया।
यूपी बोर्ड के लिए बदला गया नियम
आधार कार्ड की अनिवार्यता के चलते यूपी बोर्ड के खिलाड़ी इसमें भाग नहीं ले पा रहे थे। साई और फाउंडेशन को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने विशेष तौर पर आधार के साथ नगर निगम के जन्म प्रमाण पत्र को भी मंजूरी दे दी। फिर भी स्कूलों ने रुचि नहीं दिखाई।
विज्ञापन

60 रुपये लिया जाता है क्रीणा शुल्क
यूपी बोर्ड के सरकारी स्कूलों में 60 रुपये प्रतिवर्ष फीस खेल के मद में छात्रों से ली जाती है। तीन माह की फीस डीआईओएस कार्यालय में और अन्य फीस स्कूल अपने यहां रखते हैं। अधिकतर स्कूल इस फीस से ग्राउंड की सफाई, वार्षिक उत्सव, रैली जैसे आयोजन करवाते हैं। जीआईसी में खेल शिक्षक और जिले में इंटर स्कूल खेल प्रतियोगिताआें की जिम्मेदारी संभालने वाले नईम बताते हैं कि स्कूलों में ऐसा कोई फंड नहीं जिससे ऐसी प्रतियोगिताओं में भाग लिया जा सके। अभी संबंधित पत्र उन्हाेंने पढ़ा नहीं है इसलिए आगे क्या करना है इसके बारे में विचार नहीं किया।

वर्जन--
यूपी बोर्ड के अधिकतर स्कूलों ने रजिस्ट्रेशन फीस और तमाम कारण बताकर प्रतियोगिता से किनारा कर लिया है। किसी ने कोई रिस्पांस नहीं दिया। यह जानकारी साई को भेज दी गई है। सीबीएसई के स्कूल ही इसमें शामिल हो रहे हैं। यूपी बोर्ड के कई अच्छे खिलाड़ी स्कूलों की उदासीनता के चलते निराश होंगे।
विज्ञापन

-सचित सक्सेना, जिला समन्वयक, स्कूल स्पोर्ट्स फाउंडेशन।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें