गर्मियों में बेहतर सप्लाई देने के लिए नेटवर्क सुधार पर दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं। स्थिति यह है कि पारा 42 डिग्री पार होते ही पूरी योजना ही ध्वस्त हो गयी है। उपकेंद्रों पर क्षमता दो गुनी तक हो गयी और शहर में तीन सौ से ज्यादा ट्रांसफार्मर गए हैं, फिर भी बिजली आधी ही मिल पा रही है। पारेषण सिस्टम साथ नहीं दे पा रहा है। इससे लोगों में हाहाकार मचा हुआ है।
पिछले माह खुफिया तंत्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गर्मी शुरू होने से पहले ही घंटों सप्लाई रहना कानून व्यवस्था के लिए समस्या बताया था। इस पर जिला प्रशासन ने बिजली विभाग से बैठक कर स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 तक सभी कार्य पूरे कर लिए जाएं, इसके बाद स्काडा अथवा अन्य योजना से कोई काम नहीं होगा। विभागीय अफसरों ने स्काडा योजना कार्य बंद करा दिया तो पूरा पारेषण सिस्टम ही बैठ गया। दो दिन तक पारेषण नेटवर्क ने रुलाया तो अब हाईटेंशन लाइनें टूटना शुरू हो गयी। सभी पारेषण स्टेशन ओवरलोडिंग सेे हांफने लगे हैं। इससे उपकेंद्रों पर हुई क्षमता वृद्घि और नए लगे ट्रांसफार्मरों का फायदा नहीं मिल पा रहा है। बढ़ते तापमान के आगे विभागीय दावे टिक ही नहीं पा रहे हैं। इससे विभाग में अफरातफरी फैली हुई है।
प्रमुख उपकेंद्रों पर क्षमता (एमवीए)
- सीबी गंज, परसाखेड़ा, रामपुर बाग, सिविल लाइंस, कुतुबखाना, सुभाषनगर, हरूनगला, शाहदाना, डीडीपुरम, राजेंद्रनगर, जगतपुर, कोहाड़ापीर उपकेंद्र (20-20 एमवीए)
- 66 केवी सिविल लाइंस, किला उपकेंद्र (30-30 एमवीए)
कुल उपकेंद्र 18
क्षमता 335 एमवीए
सप्लाई क्षमता 220 एमवीए